28/10/08

काम की बाते

एक माईक्रो पोस्ट...
माचिस की तीली का सिर तो होता है, लेकिन दिमाग नही,इस लिये वह थोडी सी रगड से जल उठती है.
हमारे पास सिर भी है, ओर दिमाग भी, फ़िर हम क्यो छोटी सी बात पर इतना उतेजित हो जाते है???

15 comments:

  1. बहुत सुंदर और दम दार बात कही है आपने ! बहुत धन्यवाद इस सीख के लिए ! शुभकामनाएं !

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  2. वाह भाटिया साहब, क्या बात कही है आपने।
    हमारे पास दिमाग भी है इसीलिए तो हम माचिस से भी जल्दी जल उठते हैं। छोटे-छोटे मुद्दों पर ऐसा जलते हैं कि उसकी आंच पूरे देश में महसूस होने लगती है।

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  3. सबके पास नहीं न रहता...अक्सर सिर्फ माचिस की तरह सिर्फ सर ही रहता है. :)

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  4. तीली तो रगड़ से जलती है भाटिया जी, हम तो बिना रगड़ के ही जले-भुने रहते हैं.
    हैप्पी दिवाली!

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  5. aapne to gagar me sagar bharte hain magar aapko kais epata laga kee main aisa hun. narayan narayan

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  6. यही समझाने में बुजुर्गो की सारी उम्र निकल जाती है पर समझता कौन है ? वैसे ख़ुद जलने में मजा तो खूब आता होगा ? बारहों महीने चाहे जब दीपावली के मजे लेते रहो ! जब पटाके फोड़ने की इच्छा हो तब जलने लग जाओ ! मजा आ जाता होगा ? आख़िर फटाके भी बहुत मंहगे हैं इस साल ! :)

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  7. तीली तो फिर भी कभी-कभी खुद जल कर औरों के लिए उजाला प्रदान करती है। पर हम तो ----------------------------

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  8. बात तो बड़ी दमदार कही है

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  9. बड़ी दमदार बात......
    यदि अपना दिमाग बिना तीली के सुलगता है तो मिन्टास ले. हा हा
    शुभ ज्योति शुभ लक्ष्मी
    दीप पर्व की हार्दिक शुभकामना.

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  10. बहुत सुंदर बात ! दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  11. Bhatiaji, laakh take ki baat kahi aapne. mujhe lagta hai ki hamare pas sir aur dimag hota hai magar istemal kaise aur kahan ho, yah samajh nahin hoti. Ragdne ke liye to mano ham tayyar hi baithe hote hain.

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  12. sahi kaha tilli se jyada to hum khatarnak hain....

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  13. मस्त रहिये.. दुनिया जाए तेल लेने. जिनको गुस्सा करना है.. जिनको जलते रहना है.. उनको जलने दीजिये.. उसमें भी मजा है.. वो हम और आप अगर समझने जायेंगे.. तो वो उल्टे ही हमें कहेंगे.. आ जा री.. तू भी जरा जल के देख...

    वैसे सारी समस्या की जड़ ये हमारा दिमाग ही है.. इसका कोई नाप तौल होता नहीं. सबको लगता है, कि उसका दिमाग मस्त है.. बहुत तेज है.. और बस .. शुरू हो जाती है पंचायत.

    जानवर तो कभी जात पात, धर्म और नस्ल को लेके नहीं झगड़ते हैं.. लोग कहते हैं, कि उनके पास दिमाग नहीं.. पर फिर भी वो हमसे अच्छे हैं...

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  14. रोज़मर्रा की भागदौड में सब इतने व्यस्त हो गए....
    और अपने आम में इतने मग्न हो गए...
    की सब को सिर्फ़ अपना आप दीखता है....
    शायद इसी वजह से....

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मुझे शिकायत है !!!

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उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए, उन्हें बहू भी मत दीजिये।