
अजी बात कुछ पुरानी है, पिछले साल की जब हम मां से मिलने आखरी बार गये थे, घर से बच्चे हमे उडान से दो घंटे पहले एयर पोर्ट छोड आये, टिकट वगेरा तो मेने पहले ही घर से ऒ के कर ली थी, बोर्डिंग कार्ड बगेरा भी घर से ही ले लिया, बस समान दिया तो जल्द ही चेकिंग हो गई ओर हम अंदर पहुच गये, मेरे पास उस समय लेपटाप था, सुना था कि एयर पोर्ट पर इंटर्नेट सेवा फ़्रि है, लेकिन जब मैने जा कर इंटरनेट चलाना चाहा तो तो वो एक घंटे के ५ € मांग रह था, मेने अपना लेपटाप बन्द किया.
फ़िर टेक्स फ़्रि शाप पर गया.... बाप रे सब कुछ बाहर से यहां महंगा था, कुछ नही खरीदा, फ़िर वापिस बाहर आ गया, फ़िर एक मित्र को फ़ोन लगाया, तो राम राम के बाद उन्होने पुछा कि केसे फ़ोन लगाया, तो मेने कहा कि टाईम पास करने के लिये, ओर उन से फ़ोन पर करीब ४५ मिन्ट बात की, बात खत्म तो मुझे पेशाब आ गया, तो मेने अपना लेपटाप एक कुर्सी पर रखा उस पर अपन कोट रखा ओर मै शोचालय की ओर चल पडा, वहा काम निपटा कर वापिस आने लगा तो इधर उधर घुमता हुआ काफ़ी देर बाद वापिस आया.... तो देखा.... जिस जगह मेने लेपटाप रखा है वहां से सभी लोग दुर चले गये थे, ओर वो पुरी लाईन ही नही पुरा हाल ही खाली पडा था, उस सुन सान को देख कर मै समझा कि मेरी उडान निकल गई, लेकिन सिर्फ़ १० मिन्ट मे यह केसे हो सकता है? ओर मै अपनी मस्ती मै चलता हुआ अपनी जगह पर बेठ गया, तभी चार पुलिस वालो ने मुझे चारो ओर से घेर लिया, ओर पुछा यह समान आप का है? मैने कहा हां मेरा ही है, तो उन्होने कहा आंईदा ऎसे छोड कर मत जाये, आप की वजह से बहुत बडी गडबड होने से बच गई, ओर साथ ही उन्होने वायलेस से कोई सुचना दी दुसरी तरफ़ से आवाज आई हे भगवान तेरा ध्न्यवाद(जर्मन मै) ओर फ़िर सभी लोग धीरे धीरे वापिस मेरे आस पास बेठ गये, ओर मै सारा मामला समझ गया था,
फ़िर जब जहाज मै बेठे तो मेरे संग एक भारतिया बेठे थे, मुझे बहुत अच्छा लगा, उन के पहरावे से मुझे वो मुस्लिम लगे ओर वो थे भी मुस्लिम, जब हमारा जहाज अपनी ऊचाई पर पहुच गया तो खाने पीने की घोषणा हुयी ओर कुछ समय बाद खाना भी आ गया, मै शाका हारी हुं, लेकिन बीयर पी लेता हुं, लेकिन पास बेठे सज्जन के कारण मेने सिर्फ़ पानी ही पिया, ओर उन्होने कोला... फ़िर थोडी देर बाद एयर होस्टेज ने पुछा कि आप क्या पीयेगे( सभी से पूछ रही थी) अब मेरे दिल मै तो बीयर पीने की तीव्र इच्छा थी, लेकिन साथ बेठे भाई का ख्याल कर के मै चुप रहा, तो एयर होस्टेज ने उन से पूछा कि आप क्या लेगे... तो उन्होने एक डबल पेंग मंगवाया, बाप रे अब मेरे सब्र का बांध टुट गया ओर मेने माफ़ी मांग कर एयर होस्टेस से कहा कि अगर आप के पास यह वाली बीयर है तो मुझे एक बीयर ओर एक पेग दे दो( असल मै मैने बीयर देख ली थी) ओर मेरीआवाज सुन कर वो एयर होस्टॆज चहक ऊठी ओर बोली तुम श्री मान भाटिया हो ना? ओर मैने कहा तुम भी तो सविना हो जो हमारे डा० के यहां नोकरी करती थी, ओर फ़िर हम दोनो बहुत प्यार से मिले उस ने मुझे अपनी दोनो बाहों मै भर लिया, ओर बताया कि उस की जिन्दगी की यह पहली उडान है एयर होस्टल के रुप मे, ओर फ़िर दिल्ली तक मेरी खुब सेवा हुयी, ओर उस ने सभी से मुझे मिलवाया, ओर अपना अगला प्रोग्राम भी बताया, कहां मै बीयर पी कर सोने की सोच रहा था, ओर कहां सारी रात, सारे रास्ते उस से गप्पे मार कर निकली ओर पता भी नही चला कि कब दिल्ली पहुच गया.
घर आ कर मैने अपने घर मै सब को सारी बाते बताई, ओर जब अगली बार हम अपने डा० से मिलने गये तो वहां पता चला कि उस ने भी सब को बताया, ब्लांग मै मैने उस समय यह सब बाते इस लिये नही लिखी की मन बहुत उदास था
हां मुझे उस एयर होस्टेज ने पूछा कि जब आप मुझे पहचान गये थे तो पहले बुलाया क्यओ नही, तो मैने कहा कि जिन्दगी मै कई बार हमे एक ही सक्ल से मिलते जुलते लोग मिल जाते है, अगर तुम वो नही होती तो सोचती कि यह मेरे ऊपर लाईन मार रहा है, ओर मै यह नही चाहता था, बस इस लिये.


