5/2/08
भाई बलबिन्दर जी का कहना, मुझे शिकायत हे.
आज मुझे बलबिन्दर जी की टिपण्णी मिली,जिस मे उन्होने एक शिकायत की हे हम सब से. वेसे मे भी इस शिकायत के अनुसार इन का दोषी हू, ओर आईंदा अपनी गलतिया सुधारने की कोशिश करुगा.तो लिजिये आज की पहली शिकायत.....हिंदी चिट्ठाकारी के धरातल पर मेरी शिकायत ये है कि बहुतेरे चिट्ठाकार, वर्तनी (spelling) की गम्भीर त्रुटियाँ करते हैं तथा उनके ध्यान में यह बात लाये जाने पर बड़े ही ढ़ीठपने से उत्तर देते है कि 'आप शब्दों (की त्रुटियों) पर क्यों जाते है, भावनायें समझिये'
और तो और, यदि मेरी ओर से, perfection का आग्रह किया जाता है तो यह कटाक्ष किया जाता है कि 'क्या आपको perfection का हिंदी अनुवाद नहीं आता'
मेरी शिकायत यही है कि जब आप अंग्रेजी भाषा लिखते समय वर्तनी का ध्यान रखते हैं, अंग्रेजी भाषा पढ़ते समय मिले क्लिष्ट शब्दों को समझने के लिये, विभिन्न शब्दकोष खंगालते हैं, तो अपनी भाषा के सम्प्रेषण में भावना की जिद क्यों करते हैं। उस समय क्यों नही अपने मष्तिष्क को चौकन्ना रखते? बेशक transliteration में समस्यायें है, किन्तु लिखते समय उन्हें समझना चाहिये कि
वैश्य - वेश्या
दम - दमा
रज - राज - रजा
आदि - आदी
प्लग - प्लेग
पेज - पेग
दिन - दीन
बहुत - भुत (भूत)
मरना- मारना
जैसे अनगिनत उदाहरणों के चलते उनकी 'भावना' का अभिप्राय बदल जाता है। जरा अपने किसी अंग्रेजी भाषा के आवेदन/ प्रस्तुतिकरण में मामूली सी mistake करके देखें, जैसे
Log - Long
Part - Fart
Sum - Some
Cheque -Check
Chat -Chant
Abut -About
Bomb - Womb
हिंदी चिट्ठाकारी के धरातल पर मेरी शिकायत ये है
2. Mai 2008 18:21
और तो और, यदि मेरी ओर से, perfection का आग्रह किया जाता है तो यह कटाक्ष किया जाता है कि 'क्या आपको perfection का हिंदी अनुवाद नहीं आता'
मेरी शिकायत यही है कि जब आप अंग्रेजी भाषा लिखते समय वर्तनी का ध्यान रखते हैं, अंग्रेजी भाषा पढ़ते समय मिले क्लिष्ट शब्दों को समझने के लिये, विभिन्न शब्दकोष खंगालते हैं, तो अपनी भाषा के सम्प्रेषण में भावना की जिद क्यों करते हैं। उस समय क्यों नही अपने मष्तिष्क को चौकन्ना रखते? बेशक transliteration में समस्यायें है, किन्तु लिखते समय उन्हें समझना चाहिये कि
वैश्य - वेश्या
दम - दमा
रज - राज - रजा
आदि - आदी
प्लग - प्लेग
पेज - पेग
दिन - दीन
बहुत - भुत (भूत)
मरना- मारना
जैसे अनगिनत उदाहरणों के चलते उनकी 'भावना' का अभिप्राय बदल जाता है। जरा अपने किसी अंग्रेजी भाषा के आवेदन/ प्रस्तुतिकरण में मामूली सी mistake करके देखें, जैसे
Log - Long
Part - Fart
Sum - Some
Cheque -Check
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हिंदी चिट्ठाकारी के धरातल पर मेरी शिकायत ये है
2. Mai 2008 18:21
5 comments:
नमस्कार, आप सब का स्वागत है। एक सूचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हैं, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी है तो मॉडरेशन चालू हे, और इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा। नयी पोस्ट पर कोई मॉडरेशन नही है। आप का धन्यवाद, टिपण्णी देने के लिये****हुरा हुरा.... आज कल माडरेशन नही हे******
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मुझे शिकायत है !!!

उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए, उन्हें बहू भी मत दीजिये।
objection sustained, my Lord !!
ReplyDeleteराज जी, आपसे पूर्ण सहमति है। अब तक मैं पशोपेश में था कि गलतियाँ ठीक करें या नहीं पर अब नहीं है। इस लेख के लिए अनेक धन्यवाद।
ReplyDeleteवेसे - वैसे
हू - हूँ
लिजिये - लीजिये
भाटिया जी, आप को भी और उस से पहले बलबिन्दर जी को बधाई, इस शिकायत के लिए।
ReplyDeleteआप का ब्लॉग पढ़ने वालों को जर्मन नहीं आती आज वह आप के चिट्ठे पर दिखाई दे रही है।
जायज शिकायत है...
ReplyDelete@balwinder
ReplyDeleteचिट्ठाकारी , चिट्ठाकार
both thse words are not available in any hindi dictionary so how do we check on these
and the link where you were asked about hindi translation of perfection is http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2008/04/blog-post_17.html#comments
गल्तियाँ
is not an hindi word and is not found in any hindi kosh
besides that the mistakes that you have pointed out are not mistakes of vartni but of expression
some mistakes happen due to translation and it happens with everyone
हिंदी चिट्ठाकारी should be hindi bloging
i personally dont like चिट्ठाकारी but i have never asked aalok why he coined it and have never said its wrong
everyone may not be as proficient in hindi but everyone is not a duffer either
many mistakes can be pointed out and emailed to the writer if the intention is to get the message accross
Cheque -Check
are both used in replacement of each other even in english dictonary
http://dictionary.reference.com/browse/Cheque%20
finding mistakes is too simple in language
naari blog ki mae sutrdhaar hun aur aap kii shikaayat usi blog ko laekar the so spashtikarn dena aavyshak haen . koi bhi manch tabhie saarthk hota haen jab ham dono taraf kae logo ko apna paksh nishpaksh bhaav sae raknhe dae .
@raj bhatia
aap agar manch baayae to yae avshya dhayaan rakhe ki paksh aur vipaksh dono ho aur koi bhi shikaayat /aaksep pramaan kae saath ho agar blog yaa blogger kae baare mae ho taaki kuch virodhaabhaas dur ho sakey
koi bhi shikaayat bina documentary evidence kae meaning less haen