13/09/08

ओये बजाजे

कुछ पुरानी डायरी के पन्नो से ...........
बात काफ़ी पुरानी हे, जब मेरी शादी भी नही हुयी थी, मे शादी के सिल सिले मे भारत आया हुआ था, ओर अभी दो दिन थे शादी को, ओर दोस्त लोग रोजाना घेरे रहते थे,आज इस के तो कल उस के ओर सभी चाहते थे कि शाम उन के घर गुजरे, थोडा पीने पिलाने का दोर चल जाता था, मे बहुत ही कम पीता लेकिन फ़िर भी मजा आता था,दोपहर कही, तो सुबह का नास्ता कही, मां भी कुछ ना कहती, ओर दिन ऎसे ही गुजरते गये, फ़िर हमारे हाथ भी पीले हो गये, ओर कब एक महीना गुजर गया पता ही नही चला, सब दोस्तो के घर चार चार बार खा आये लेकिन किसी को घर मे एक चाय का कप भी नही पिलाया, बस जो बारात मे गये वही सब ने खाया सो खाया या फ़िर घर मे जो पार्टी हुयी उस मे , फ़िर एक दिन सब को घर पर बुलाया सब बच्चो वाले थे मेरे सिवा, ओर उस दिन सारा दिन हम सब ने खुब मजे लिये, ओर मेरे घर पर भी सब को मजा आया.

इन दोस्तो मे एक दोस्त था बजाज, जो पहले सब से ज्यादा चहकता था, स्कुल मे कालेज मे,हर लडकी पर अपना हक जताना, फ़िर उस से बात करना हम सब का हीरो, ओर हम सब उसे गुरु मानते थे, क्योकि लडकी को देख कर हमे सर्दियो मे भी पसीना आ जाता था, ओर जुबान बन्द हो जाती, उस से पुछते केसे पुटाये लडकी, लेकिन गुरु कि शिक्षा लडकी के सामने जा कर फ़ुस हो जाती, ओर गुरु हमे खुब गालिया देता, अब मेरे इस एक महीने के दोर मे इस बजाज को छोड कर सब दोस्तो ने बार बार बुलाया, ओर आज बजाज भी हमारे घर पर अपनी बीबी ओर बच्चो के संग आया था.

मेरी बीबी की सभी सहेलिया बन गई, ओर सभी नारियां अलग ओर हम सब अलग बाते कर रहे थे, साथ मे थोडी बहुत शराब भी चल रही थी, सब ने ध्यान दिया की आज बजाज कुछ चुप सा हे, ओर पी भी नही रहा,नही तो पहले बीयर की बोतल उस से खोसनी पडती थी, सब ने पुछा बजाजे सब ठीक तो हे, तबियत ठीक हे, तो बोला हां, तो दुसरा बोला यार तु तो रोनक हुआ करता था आज तेरी बोलती केसे बन्द हो गई कही भाभी ज्यादा ताकतवर तो नही इस पर सभी हंस पडे, तो निश्चित हुआ कल शाम बजाजे के घर (हम सब उसे बजाजे कहते थे). तो बजाज बोला ठीक हे, लेकिन मेने पीनी छोड दी, ओये क्यो एक ने पुछा तो बजाज बोला मेने नाम ले लिया हे राधा स्बामी का ( यहां किसी को बुरा लगे तो मे पहले से ही माफ़ी मांग लेता हू, मेरा मकसद किसी को बदनाम करना नही बस अपनी ओर दोस्तो की बात कर रहा हू,)तो सब ने कहा ठीक हे तुम मत पीना लेकिन हमारे लिये ला कर रखना.बजाज ने अनमने मन से हां कर दी.

दुसरे दिन सभी दोस्तो की टोली उस के घर पहुचं गये, ओर बजाजे ने एक बोतल छुपा कर दे दी ओर बोला ऊपर जा कर बेठॊ ओर मेरी बीबी को पता ना चले इस बोतल का, उस के मां बाप नीचे रहते थे, ओर वह ऊपर, हम सब ऊपर चले गये, ओर जेसा की अपने घरो मे होता हे उसने सब को गिलास दिये, एक पानी का मग ओर एक छोटी सी मेज बीच मे रख दी,साथ ही बोला बोतल नीचे रखना,सभी दोस्तो ने एक पेग डाला ओर बजाजे ने एक गिलास मे कोला डाली, चियर्स के बाद वह कभी पकोडे लेने जाये तो कभी सब्जी, तो कभी मटरी , सभी दोस्त अभी एक पेग भी नही पी पाये थे, कि उस दोराना बजाज चार पांच चक्कर लगा आया किचन के, फ़िर दुसरा पेग डाला, बजाज ने बची हुई कोला डाली..फ़िर से बो नमकीन लेने गया ओर जब वापिस आया तो हमे लगा कि वह कुछ झुम रहा हे, ओर हम मे से किसी ने इस को वहम समझा.

थोडी देर के बाद बजाज फ़िर कुछ करने अन्दर गया, इस बार फ़िर मे लगा कि यह झुम रहा हे, फ़िर भी हम ने सोचा यह तो नाम dhaarii हे, शायद हमे ही चढ गई हे,तो सब ने कहा बजाजे आज यार नशा जल्दी होगा लगता हे यार खाना डलवा, बजाज फ़िर अन्दर गया, थोडी देर बाद गिरता गिरता ओर गुण गुणाता अ बोला खाने मे थोडी देर ओर हे, तो दोस्तो ने पुछा हम पी रहे हे गिर तु रहा हे,यह कया माजरा हे, तो अब बजाज थोडा अपने पुराने वाले रंग मे आया ओर बोला होता हे, सालेयो तुम्हे चढ गई हे. हम चुप हमारे दोस्तो मे एक बनवारी लाल जी भी थे, जो देखने मे बिलकुल भोले भाले लेकिन इस बजाज के बाप थे,इस बार जब बजाज वहाने से उठा ओर अन्दर गया तो बनवारी लाल जी भी दबे पावं पीछे हो लिये , ओर झट से एक अग्रेजी शराब की बोतल ओर उस बजाज को पकड कर ले आये.

हम सब हेरान,फ़िर बजाज ने हाथ जोड कर हम सब से माफ़ी मागीं ओर कहां यार मे भी पीता हू, लेकिन जब से नाम लिया हे, तब से चोरी पीता हू.
ओर वह शाम हमारी सब की सब से अच्छी शाम बीती हमारा यार बजाज फ़िर पहले रंग मे आ गया था, ओर सारी रात ठहक्के पर ठहक्के गुजे, बीच मे किसी ने उसे कहा भाई तेरा नाम तो बजाज बोला आज नाम की छुट्टी, लेकिन सभी ने पी बहुत ही कम लेकिन नशा बातो का बहुत हुआ, ओर वो शाम हमारी सब की शान दार शाम बनी, पहले तो सब भागने कि कर रहे थे, ओर फ़िर सब का मन जाने को नही कर रहा था.
धन्यवाद, लेकिन अब सभी दोस्त बिछुड गये ....... बस यादे बच गई हे

11 comments:

  1. हा हा हा भाटिया सर बेहद अच्‍छी रचना है खूब एंज़ाय किया इसे पढते पढते अच्‍छा लिखा है आपने वैसे तो आप हो ही उस्‍ताद लेखनी के अच्‍छी लगी आपकी पुरानी यादें

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  2. purani baate jaad karna sukhad hai.....inki khushboo bhar se man mahak jaata hai

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  3. बहुत खूबसूरत यादो की जुगाली की आपने ! बड़ा आनंद आया ! सही कहा आपने सब बिछुड़ गए , सिर्फ़ यादे रह गई ! और भी दोस्तों की किसी महफ़िल का सतसंग लाभ करवाइए ! बहुत
    मजा आया ! धन्यवाद !

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  4. धन्यवाद। बजाजे ने सोई पडी यादों को जगा कर रख दिया।

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  5. अच्छा संस्मरण बांटा आपने हमारी साथ... धन्यवाद.

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  6. बेहद रोचक वृतांत .....हँसी के साथ पोस्ट हो तो मजा दुगुना हो जाता है....इसी बात पर एक पैग मेरी ओर से....चियर्स :)

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  7. मजेदार संस्मरण

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नमस्कार, आप सब का स्वागत है। एक सूचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हैं, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी है तो मॉडरेशन चालू हे, और इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा। नयी पोस्ट पर कोई मॉडरेशन नही है। आप का धन्यवाद, टिपण्णी देने के लिये****हुरा हुरा.... आज कल माडरेशन नही हे******

मुझे शिकायत है !!!

मुझे शिकायत है !!!
उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए, उन्हें बहू भी मत दीजिये।