17/09/08

मुझे शिकायत हे टिपण्णियो के झगडे से

आप सभी को नमस्ते, सलाम.
भाई हम लोग बांलग पर इस लिये आते हे , कुछ उलट सीधा लिखते हे,(कोई कविता मे माहिर हे, तो कोई गजल ओर कहानी लिखने मे) ओर हम जेसे लोग यहां ना तो पेसा कमाने आते हें ओर ना ही किसी का दिल दुखाने( मेरे किसी भी बांलग पर आप को कोई भी एड नही नजर आये गी)बस दिल वहलाने आते हे, कुछ विचार अपने बताये, कुछ बाते की, कुछ आप की सुनी , यह सब हम अपने अपने लेखो दुवारा ओर टिपण्णीयो दुवारा करते हे, मेरे लेखो मे तो बहुत ही गलतियां भी होती हे, लोग फ़िर भी होसला बढाते हे, कभी कभी बहुत ही प्यार से मेरी गलती की ओर भी धयान दिलाते हे, जो मुझे अच्छा लगता हे.
अब जब हम किसी को नमस्ते करेगे, तो दुसरा भी हमे जबाब मे नमस्ते करेगा, जिस से हम सब एक दुसरे के करीब आते हे, ओर हमे अपनी अपनी गल्तिया का भान होता हे, यह सब टिपण्णीयो के रास्ते होता हे, अब अगर कोई कहे की आप की टिपण्णी मे तो ज्यादा लिखा नही होता तो अब आप ही बातये कि एक कविता , गजल ओर कहानियो , लेकॊ मे कया क्या लिखना चाहिये जिस से लगे की यह एक शुध्द भारतीया टिपण्णी हे, वेसे हमे गालिया, ओर गलत बाते नही आती जिसे शायद लोग कहते हो करारी करारी टिपण्णी, ओर अगर आज के बच्चे हमे इस बारे मे कोइ राय देना चाहते हो तो जरुर देवे, लेकिन भारतीया सभ्यता ओर संस्कार मे जमे पले बच्चे यह ना भुले की अपनो से बडो के साथ किस तरह से बात करनी चाहिये.
किसी का अपमान कर के अगर आप यह सोचते हो कि लोग आप को शावश देगे या आप की पीठ थपथपाये गे तो आप गलत हे, ओर जो ऎसा karegए ओर आप को करने को कहेगे वह आप के दोस्त नही दुश्मन होगे क्यो कि आप को गलत रास्ता दिखा रहे हे, कहते ही पहली भुल सभी माफ़ कर देते हे,
आप सब से निवेदन हे की इस जगह ऎसी बाते करके किसी का अपमान ना करे, क्योकि यहां हम ने किसी को नही देखा ना ही किसी के बारे जानते हे फ़िर क्यो दुशमनी करे, अगर दोस्ती नही कर सकते तो चुप रहॊ, उन से दुर रहो, आप भी मस्त रहो , दुसरो को भी मस्त रहने दो, मे भी ९०% टिपण्णीयो मे बहुर कम शव्द लिखता हु, ओर कभी कभी सिर्फ़ :) से ही काम चलता हे,
आप सब आजाद हे ओर दुसरो को भी आजाद रहने दो यही मेरी शिकायत हे ओर आप सब से प्राथना भी कि अब ओर नही, सब अपनी अपनी मस्ती मे रहॊ
धन्यवाद

33 comments:

  1. aap ne bahut sahi likha hai, main aap ke vichro se sahmat hun, aap niras na ho.

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  2. सलाह के लिए आभार.

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  3. भाटिया साहब धन्यवाद ! पता नही किस सिरफिरे का ये काम है ! अब जो वरिष्ठ हैं वो तो वरिष्ठ ही रहेंगे ! और मेरे हिसाब से आज समीरजी के ब्लॉग पर अच्छा लिखा गया है इस बारे में ! शायद अब कुछ कहने को बाक़ी नही है ! हम तो ख़ुद इस बात से दुखी हैं ! आज शाम को एक गुमनाम टिपणी मेरी उड़नतश्तरी वाली पोस्ट पर आई है ! सोचता हूँ इसको मिटा दूँ या जवाब दूँ ! आप कृपया देखे और सलाह दे ! मैं तो यहाँ आनंद के लिए आया था ! ये सोचकर की चलो यहाँ थोडा समय पास हो जायेगा ! अगर ये ही सब करना था तो अपना क्लब क्या बूरा है ! शायद अब कुछ सोचना पडेगा !

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  4. बिलकुल सही कह रहे हैँ राज भाई
    - लावण्या

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  5. अच्छी बातें करी आपने।

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  6. नमस्ते का जवाब नमस्ते तो ठीक है...लेकिन जाने क्य़ों लोगों को नमस्ते कहना भी बुरा लग जाता है....और कभी कोई अपनी और से नमस्ते करे भी तो गलतफहमी भी लोगों में हो जाती है कि मेरे अच्छे लिखने की वजह से ही नमस्ते (टिप्पणी ) हुई है....वैसे नमस्ते के नाम पर एक वाकया याद आया कि....हमारे साथ पढने वाले महेश नाम के मित्र की आदत थी कि वह अपने चश्में को बार-बार उंगली से ठीक कर लेते थे...रह रहकर जब वो एसे करते तो लगता किसी को आदाब कर रहे है... हमारे एक शिक्षक के सामने भी वही हरकत कर बैठे....चश्मा ठीक करने के लिये हाथों को उपर बढाया ही था कि शिक्षक को लगा नमस्ते कर रहा है....वह भी हाथ नमस्ते की मुद्रा में ले आये और जब देखा कि चश्मा ठीक किया गया है तो फट से हाथों को अपने सिर पर ले जाकर बाल ठीक करने लग गये...मानों कुछ हुआ ही नहीं :) ईसलिये कह रहा हूँ...नमस्ते में भी गलतफहमीयों की गुंजाइश रहती है :) अब जो लोग टिप्पणी न करना चाहें...न करें लेकिन उस पर इतना बावेला मचाना ठीक नहीं लग रहा है....आप की राय से सहमत हूँ।

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  7. बिलकुल सही बात है। टिप्पणियों को लेकर इतना हल्ला-गुल्ला समझ में नहीं आता।

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  8. very well and rightly said, every one should adhere to this appreciable thought'

    Regards

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  9. अपनी अपनी मस्ती मे रहॊ...
    sunder lekh

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  10. आपकी मस्‍त मि‍जाजी खुदा की नेयमत है, सबको नहीं मि‍लती। आपको हमेशा पढ़ता हूँ और देखा है, आपकी शि‍कायत में भी शि‍कायत कम, आग्रह और सबके लि‍ए प्‍यार से लबरेज बातें अधिक रहती हैं।

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  11. बहुत अच्छी बात कही है आपने... पर लोगों को हर बात से समस्या हो रही है आजकल... क्या किया जा सकता है उनका.

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  12. बढिया लिखा है आपने। आप ब्लाग काँव-काँव पढते है कि नही? नयी पोस्ट मे टिप्पनियो पर ही चर्चा है।

    http://hast-rekhaa.blogspot.com/2008/09/blog-post_18.html

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  13. काश ऐसा सभी सोच सकें, लेकिन यहाँ तो लोग किसी कि उम्र का भी लिहाज़ नही करते, ये उनके संस्कार हैं, क्या किया जाए...

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  14. bilkul thik kaha aapne.. baki to sameer ji ne bhi kafi kuch kaha hai is vishay mein..

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  15. बिल्कुल सही कहा राज भाई आपने. बहुत हो गया टिप्पनिओं पर हो हल्ला. अब इसे विराम देकर विचारों और अच्छी बातों का आदान प्रदान करेंगे. जो टिप्पणी दे उसका भला जो ना दे उसका भी भला. क्या वाकई हम लोग केवल टिप्पनिओं के लिए इस जगत में आए थे... क्या वाकई टिप्पणी इतना जरूरी है की इसकी lambai और चौडाई के लिए लड़ना और रूठना पड़े....आप अच्छा लिखें और उस पर आई एक टिप्पणी भी आपके लेखन की कद्रदान है

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  16. बिल्कुल सही कहा है भाटिया जी, हम यदि अपने से मतलब रखें तो ज्यादा बेहतर

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  17. आपने बिल्कुल वाजिब बात की है. ऐसी सोच ही हिन्दी ब्लागिंग को आगे ले जाने में सहायक होगी.

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  18. जाने कैसी उंगलियां थीं, जाने क्या अंदाज था, उसने पत्तों को छुआ था, जड़ें हिला कर रख दीं।

    क्यों इतनी परेशानी। दुनिया में लाखों लोगों को चाँद में सिर्फ़ दाग नज़र आते हैं, गिलास आधा खाली दिखता है, फूलों की खुशबू से उनका सर दर्द करने लगता है। इससे चंद्रमा का मान कम नहीं हो जाता या फूलों की सुगंध बदनाम नहीं हो जाती। मेरी आप सबसे यही गुजारिश है कि इस विषय पर और कुछ ना कहा जाये, जितनी बहस होगी उतना ही किसी का मंसूबा पूरा होगा।

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  19. टिप्पणियां वाकई में वैचारिक स्तर पर होनी चाहिये, न कि व्यक्तिगत स्तर पर!!


    -- शास्त्री

    -- ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसने अपने विकास के लिये अन्य लोगों की मदद न पाई हो, अत: कृपया रोज कम से कम 10 हिन्दी चिट्ठों पर टिप्पणी कर अन्य चिट्ठाकारों को जरूर प्रोत्साहित करें!! (सारथी: http://www.Sarathi.info)

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  20. आपकी ऊपर लगाई स्क्रॉल लाइन बहुत जमी -

    लहरों से डर कर नौका पार नही होती।
    हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती॥

    नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है,
    चढ़ती दीवरों पर सौ बार फिसलती है।
    मन का विश्वास रगों में साहस बनता है,
    चढ़ कर गिरना, गिर कर चढ़ना ना अखरता है।
    आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
    कोशिश करने वालों की हार नहीं होती॥

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  21. आप सभी का धन्यवाद, मुझे खुशी हुयी आप सब के भी विचार जान कर ,सतीश जी आप ने सही कहा हे, लेकिन .... मे जिस जगह रहता हू वह एक छोटा सा गावं हे, सुबह साम या दिन मे कभी भी आप सडक पर जाओ हर मिलने वाला आप कॊ नमस्ते जरुर कहेगा आप जबाब दो या ना दो ओर ज्यदातर सभी उस नमस्ते का जबाब देते हे, ओर कभी कोई नमस्ते ना कहे तो लगता हे हम से नाराज हे अगर तो रोजाना का मिलने वाला हे तो सभी पुछ लेते हे, भाई क्या नारजगी हे जो आज नमस्ते नही कही या जबाब नही दिया.
    लेकिन कई लोग कभी भी नमस्ते नही कहते, ओर ना ही जबाब देते हे ओर ऎसे लोग पुरे गावं मे प्रषिद्ध होते हे, ओर फ़िर धीरे धीरे गावं वाले भी उन्हे नमस्ते कहना छोड देते हे......

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  22. Raj saheb, sahi likha hai aapne parantu apni apni soch hoti hai, kis kis ko hum sanskar sikhayenge. jaisa ki dusare doston ne kaha, apne aap men mast rahen.

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  23. एक दम सही कह रहे हैं। ब्रेन वास कर दीया :)

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  24. Sir, you are correct. aajadi se ham khud bhi aajd rahte hai aour dusaron ko bhi aajad rahne dete hai.

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  25. देरी के लिए माफ़ी राज साहिब.....तबियत भी नासाज है ओर ब्लॉग में पिछले दिनों उठा-पठक हुई .टिप्पणियों पर व्यंग्य लिखना तो समझ आता है...पर इन दिनों ओवर- डोसिंग हो रही है.....

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  26. bahut sunder sthan per meri baat
    उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए उन्हें बहू भी मत दीजिये।
    lagaai hai
    ek baat jaroor kahungaa ise bold kar len

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  27. bahut khoob kaha apne Raj G main apse purntya sahmat hu.

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  28. सही कहा आपने भाटिया साहब, पर जहॉं चार बर्तन होंगे, तो आपस में तो टकराएंगे ही।

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  29. bahut badhiyaaaaaaaaaaaaaaaa.
    likhte rahiye

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  30. बहुत अच्‍छी बात है कि आपको टिप्‍पणियों के झगडे से शिकायत है। झगडा कोई भी हो, वह अच्‍छा नहीं होता।

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नमस्कार, आप सब का स्वागत है। एक सूचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हैं, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी है तो मॉडरेशन चालू हे, और इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा। नयी पोस्ट पर कोई मॉडरेशन नही है। आप का धन्यवाद, टिपण्णी देने के लिये****हुरा हुरा.... आज कल माडरेशन नही हे******

मुझे शिकायत है !!!

मुझे शिकायत है !!!
उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए, उन्हें बहू भी मत दीजिये।