ऐसे तो हो चुका नक्सलवाद का इलाज
1 hour ago
वक़्त आने पर बता देंगे तुझे ए आसमाँ हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
हिन्दी हितार्थ
मैं कहता हूं कि आप अपनी भाषा में बोलें, अपनी भाषा में लिखें।उनको गरज होगी तो वे हमारी बात सुनेंगे। मैं अपनी बात अपनी भाषा में कहूंगा।जिसको गरज होगी वह सुनेगा। आप इस प्रतिज्ञा के साथ काम करेंगे तो हिंदी भाषा का दर्जा बढ़ेगा।--
महात्मा गांधी
अंग्रेजी का माध्यम भारतीयों की शिक्षा में सबसे बड़ा कठिन विघ्न है।...सभ्य संसार के किसी भी जन समुदाय की शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।"--
महामना मदनमोहन मालवीय
5 आप की राय:
नमस्कार जी!
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद, मन तो नही करता कि जाऊ क्योकि आप सब ने इतना प्यार दिया हे, लेकिन अब यहां कुछ अजीब सा लगता हे, इस लिये आज यह मेरी आखरी पोस्ट हे, वेसे मे आता रहुगा टिपण्णी के रुप मे.
'लेकिन अब यहां कुछ अजीब सा लगता हे,'
लगता है किसी बात ने आपके दिल को चोट पहुँचायी है। हम आपको नही जाने देंगे। हम सब आपके साथ है और लगातार आपको पढना चाहेंगे।
आपने ही जिद कर मुझे रोका है। अब आप जाने की बात न करे।
अरे ऐसा क्या हो गया राज जी।
नमस्कार पर अलविदा नहीं !
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आप का धन्यवाद आप ने अपना बहुमूल्य समय हमे दिया, अपने विचार प्रकट किये,