30/11/09

अंताक्षरी १० गीतो भरी

अन्ताक्षरी नंO 10 गीतों भरी में आपका स्वागत है।
अन्ताक्षरी के बारे में आप अपने विचार भी व्यक्त करेंगें तो हमें सुविधा होगी, जिससे इस खेल में रोचकता बनी रहे। आशा है इसी प्रकार आपका सहयोग मिलता रहेगा । आप सबके सुझावों और शिकायतों का हमें इंतजार है।

अन्ताक्षरी को ज्यादा रोचक बनाने के लिये कुछ फेर-बदल किये गये हैं और नये आने वाले मित्रों के लिये भी आज अन्ताक्षरी के कुछ नियम दोबारा बता देते हैं।

1> सोमवार से वीरवार तक हर रोज नयी अन्ताक्षरी गीतों भरी खेली जायेगी। इसका भारतीय समय सुबह 10:00 बजे से अगली सुबह 6:00 तक रहेगा। यानि आप पूरे बीस घंटे में किसी भी समय जब फ्री हों तब भी खेल पायेंगें।
2> शुक्रवार को शुरू होने वाली अन्ताक्षरी कविताओं भरी को इतवार की सुबह 6:00 बजे तक खेला जायेगा।
3> अन्ताक्षरी कविताओं भरी में आप अपनी या किसी की भी कोई कविता, शेर, गजल गा सकते हैं।
4> प्रत्येक अन्ताक्षरी में तीन विजेता हो सकते हैं। प्रथम सबसे ज्यादा टिप्पणी करने वाले (आयोजकों की नही), द्वितीय जिनके दिये अक्षर पर कोई भी गाना नही आयेगा, तृतीय जो आखिर तक खेल खेलेंगें।
5> सोमवार को सभी विजेताओं के नाम घोषित किये जायेंगें और उनके ब्लाग या नयी पोस्ट को भी प्रचारित किया जायेगा।

कृप्या अपने दिये हुए अक्षर पर खुद गाना ना गायें। अपना अक्षर देने के बाद कृप्या धैर्य रखें और 2-3 मिनट इंतजार करने के बाद कमेंट पन्ने को रिफ्रेश या रिलोड करें। F5 दबा कर, अपने दिये अक्षर के बाद गाये गानों को जरूर पढें, अगर कोई गलती करता है तो सबको सचेत करें। चेन को टूटने ना दें, अगर चेन टूटती है तो सबको बतायें और वहीं से शुरू करें जहां से चेन टूटी थी। अगर एक ही अक्षर पर दो टिप्पणियां आती हैं तो पहले पब्लिश हुई टिप्पणी के दिये अक्षर पर गाना लिखें। झुंझलायें नहीं और जल्दी से रिफ्रेश करके टिप्पणी लिखें।

पिछले सप्तहा मै टिपण्णी विजेता यानि जिन्होने सब से ज्यादा टिपण्णियां दी....
प्रथम स्थान पर विजेता है हमारी संगीता पुरी जी सब से ज्यादा टिपण्णियां करीब १०६
दुसरे स्थान पर विजेता हौ हमारे प्रकाश गोविन्द इन्होने ९८ टिपण्णियां की है
तीसरे स्थान पर विजेता है हमारी Nirmla Kapila जिन्होने ६० से ऊपर टिपण्णियां की है
तालियां जोर दार जी

अरे अरे सुनो भई ओर कल की आंतक्षरी मै विजेता बनी फ़िर से हमारी सब की गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष विशेषय्ग्या ओर हम सब के भाविषया का हाल बताने वाली संगीता पुरी जी
अब फ़िर से जोर दार तालियां, ओर हां भई मै इस पापी पेट के लिये सुबह काम पर जाता हुं, लेकिन मेरी जगह समभालते है आज के होनहार नोजवान
अन्तर सोहिल जी ओर इन सब आंताक्षरी का श्रे भी उन्हे ही जाता है, ओर फ़िर शाम को मै आ जाता हुं, तो अब हमारे नोजवान साथी अन्तर सोहिल जी के लिये भी जोर दार तालियां.
हमारी टीम ने सोचा कि हम इस ब्लांग का नाम बदल दे, लेकिन फ़िर सोचा क्यो? क्यो भाई हमे भी अभी भी शिकायत है, अरे आप सभी क्यो नही आते आंतक्षरी खेलने, एक बार आओ फ़िर देखे केसे आप बचपन मै लोट जाते है, हम सब को भी कभी कभी बच्चा बनाना चाहिये, तभी तो हम अपने बच्चो के दोस्त बन पायेगे....
तो आईये ओर हम संग खेले ओर थोडी देर के लिये सब गम भुल जाये...
तो चले आज की आंतक्षरी की तरफ़.. ओर आज तो आप के होंठो पर एक सुंदर सी मुस्कुराहट ले ही आए हम जी
किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार
किसीका दर्द मिल सके तो ले उधार
किसीके वास्ते हो तेरे दिल में प्यार
जीना इसी का नाम है
"ह" से

36 comments:

  1. हर खुशी हो वहा, तू जहां भी रहे
    जिन्दगी हो वहां तू जहां भी रहे

    "ह"

    ReplyDelete
  2. har ghadi badal rahi hai roop zindagi,chawn hai kahi,kahi hai dhoop zindagi

    "ग"

    ReplyDelete
  3. गीत गाता चल ओ साथी गुनगुनाता चल !! 'ल' से

    ReplyDelete
  4. मैने इतनी सारी टिप्‍पणी कर ली .. बताने और विजेता बनाने के लिए आपका शुक्रिया !!

    ReplyDelete
  5. पापी पेट के लिये सुबह काम पर जाता हुं, लेकिन मेरी जगह समभालते है आज के होनहार नोजवान अन्तर सोहिल जी
    अंतर सोहिल जी को पापी पेट की कोई चिंता नही क्‍या ??

    ReplyDelete
  6. lambu ji lambu ji ,bolo tingu ji,mere raste mein tang na adana,i kanya ko haath na lagana..

    ReplyDelete
  7. नाम हरि का जप ले रे वंदे फिर पीछे पछताएगा !! 'ग' से

    ReplyDelete
  8. gori tera gaon bada pyara,mein tho gaya hara aake yaha re,aake yaha re

    ReplyDelete
  9. रेशमी सलवार कुर्ता जाली का , रूप सहा नहीं जाए नखरेवाली का !! 'क' से

    ReplyDelete
  10. कहीं दूर जब दिन ढल जाये, शांझ की दुल्हन नजर चुराये. (य)

    ReplyDelete
  11. याद न जाये बीते दिनों कि... "क"

    ReplyDelete
  12. कभी तेरा दामन न छोडेंगे हम हाय , चाहे जमाना करे लाखों सितम !! 'म' से

    ReplyDelete
  13. maine rakha hain mohabbat apne afsane ka naam
    tum bhi kuchh achha sa rakhdo apne diwane ka naam

    ReplyDelete
  14. मुझे प्यार की ज़िन्दगी देने वाले कभी गम न देना खुशी देने वाले
    *ल* पर

    ReplyDelete
  15. लो आ गयी उनकी याद .. वो नहीं आए । 'ए' से

    ReplyDelete
  16. एक तो सूरत प्यारी और ऊपर से ये नाज़,
    दिल लेने के तौबा ये कैसे हैं अंदाज़
    "ज"...

    आओ जी आगे खेले

    ReplyDelete
  17. जब भी ये दिल उदास होता है जाने कौन आस पास होता है
    *है* पर्

    ReplyDelete
  18. है इसी में प्यार की आबरू
    वो ज़फ़ा करें मैं वफ़ा करूँ
    "र"

    ReplyDelete
  19. raja ki aayegi baarat,rangili hogi raat,sajan mein nachungi, raja ki aayegi baaraat..

    ReplyDelete
  20. तेरा मेरा प्यार अमर, फिर क्यों मुझको लगता है डर
    मेरे जीवन साथी बता, दिल क्यों धड़के रह-रह कर
    "र"

    ReplyDelete
  21. राम करे ऐसा हो जाए मेरी निंदिया तोहे मिल जाए मै जागूं तू सो जाए
    "ए"

    ReplyDelete
  22. वाह भाई!!! थोडा सा इधर-उधर क्या गये यहाँ तो नये लोगो ने जगह ले ली.......

    ReplyDelete
  23. एक मैं और एक तू. दोनों मिले इस तरह.
    और जो तन मन में हो रहा है. ये तो होना ही था.

    'थ'

    ReplyDelete
  24. थोड़ी देर के लिए मेरे हो जाओ
    मेरे दिल मेरी साँसों में खो जाओ
    मेरे प्यार की छाँवों में सो जाओ
    मंज़िल न मिले कभी हाय
    "य"

    ReplyDelete
  25. ये तो कल वाली ही है .. आज नई नहीं शुरू हुई क्‍या ??

    ReplyDelete
  26. संगीता जी कल समय नही था,हम दोनो के पास, इस लिये आज इसी से काम चलाते है, कल नयी होगी, धन्यवाद
    तो हो जये "य" से

    ReplyDelete
  27. ये गलियां ये चौबारा यहां आना ना दोबारा अब हम तो भए परदेशी कि यहां तेरा कोई नहीं !! 'ह' से

    ReplyDelete
  28. हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे
    तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ
    "ऒ"

    ReplyDelete
  29. ओ जय जय शिव शंकर कांटा लगे ना कंकड कि प्‍याला तेरे नाम का पिया !! 'य' से

    ReplyDelete
  30. ये कैसी अजब दास्ताँ हो गई है
    छुपाते छुपाते बयाँ हो गई है
    "ह"

    ReplyDelete
  31. होली आई रे कन्‍हाई रंग झलके , सुना दे जरा बांसुरी ... 'र' से

    ReplyDelete
  32. रुक जा रात ठहर जा रे चंदा बीते न मिलन की बेला
    आज चांदनी की नगरी में अरमानों का मेला
    "ल"

    ReplyDelete
  33. लो चली मैं , अपने देवर की बारात लेके , लो चली मैं , ना बैंड बाजा ना ही बाराती , खुशियों की सौगात ले के लो चली मैं । 'म' से

    ReplyDelete
  34. मस्त नज़र देख इधर हम हैं वही दिलवाले
    इश्क़ में जो देते हैं जाँ हम हैं वही मतवाले
    "ल"

    ReplyDelete

नमस्कार, आप सब का स्वागत है। एक सूचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हैं, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी है तो मॉडरेशन चालू हे, और इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा। नयी पोस्ट पर कोई मॉडरेशन नही है। आप का धन्यवाद, टिपण्णी देने के लिये****हुरा हुरा.... आज कल माडरेशन नही हे******

मुझे शिकायत है !!!

मुझे शिकायत है !!!
उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए, उन्हें बहू भी मत दीजिये।