12/01/10

मेरी उलझन

बात बहुत पुरानी है जी एक बार मेरे दादाजी ने एक दुकान से दस पैसे का कुछ सामान खरीदा। उन्होंने दुकानदार को पचास पैसे दिये। दुकानदार ने उनसे कहा कि उसके पास चालीस पैसे खुल्ले (छुट्टे) नही हैं और दादाजी के पचास पैसे वापिस लौटा दिये। अब दादाजी ने उस दुकानदार को एक रुपया दिया तो दुकानदार ने दादाजी को नब्बे पैसे (सामान के दस पैसे काटकर) वापिस कर दिये। आप लोग मुझे बतायें कि जब दुकानदार के पास चालीस पैसे खुल्ले (छुट्टे) नही थे तो उसने दादा जी को नब्बे पैसे कैसे वापिस किये।

21 comments:

  1. राज जी, आपकी उलझन सुलझाने के चक्कर में अब तो हम ही उलझ गये हैं इस उलझन में।

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  2. आपके दादाजी के जमाने में इकन्नी चला करती थी जो छह नये पैसे की होती थी.

    आपके दादाजी को दुकानदार ने 15 इकन्नी दे दीं, यानी कुल नब्बे पैसे...

    इन इकन्नियों से आप चालीस पैसे नहीं बना सकते..

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  3. भई हम भी उलझे है इस पहेली मै..... यह सवाल अन्तर सोहिल जी ने पूछा है, ओर वो ही सही जबाब भी देगे... लेकिन आज नही.. पहले आप महारथी बताये, आप के बाद

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  4. दो जबाब हो सकते है
    पहला तो जो रवीस जी ने दिया कि उसके पास ४ नए पैसे खुले नहीं थे !
    और दूसरा यह हो सकता है कि लाला पागल था !

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  5. भई आपकी कहाँ..अब तो ये हमारी उलझन हो चुकी है :)

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  6. हो सकता है इस बीच कोई दुसरा ग्राहक आ गया हो ओर खुले पेसे दे गया हो? राम जाने

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  7. वो वाला छह पैसा। जो एक आना कहलाता था। पर उस जमाने में तो सोलह आना एक रुपया के बराबर होता था।
    उलझन ही उलझन है।

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  8. मुझे तो रवि सिंह जी का जवाब ही सही लग जहा है.

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  9. शायद दुकानदार झूठ बोल रहा था कि छुट्टे नहीं है....

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  10. अरे भाई, उसने अठन्नी लेनी बंद कर रखी थी, आगे की सोच कर।

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  11. मुझे डॉ टी एस दराल जी की टिपण्णी मै जबाब दिख रहा है अठन्नी खॊटी हो सकती है

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  12. मुण्‍े तो रवि सिंह जी का जबाब ही सही लग रहा .. मैं उलझन में नहीं पडनेवाली .. कल अंतर सोहिल जी तो जबाब दे ही देंगे !!

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  13. दुकानदार ने उन्हें तीन पैसे के तीस सिक्के वापस दिए। तब तीन पैसे का सिक्का प्रचलन में था।

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  14. Raveesingh ji ka jawab--
    आपके दादाजी के जमाने में इकन्नी चला करती थी जो छह नये पैसे की होती थी.

    आपके दादाजी को दुकानदार ने 15 इकन्नी दे दीं, यानी कुल नब्बे पैसे...

    इन इकन्नियों से आप चालीस पैसे नहीं बना सकते..

    aur Dinesh ji ka jawab dono ke saath hain...
    us jamaane mein 3 paise ke sikke bhi chalte the aur ikanni bhi....

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  15. लाला क्रेडिटिबिलिटी चैक कर रहा होगा दादाजी की...कि बड़ा नोट रखे हैं कि नहीं...हमें नहीं पता..अंदाज ही तो सब लगा रहे हैं.

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  16. भाई अंतर सोहिल जी, वो दुकानदार ताऊ ही था. मुझे अच्छी तरह याद है कि मैने वो रुपया रख लिया था " खुले नही हैं" के नाम पर.:)

    रामराम.

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  17. आदरणीय राज जी,
    आपकी उलझन रवि जी, दिनेश जी और अल्पना जी ने गणितीय रूप में तो सही सुलझा ली है और हमारी भी यही राय है।

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मुझे शिकायत है !!!

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उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए, उन्हें बहू भी मत दीजिये।