27/11/10

एक पैसे वाला शरीफ गुन्डा और बंटी चोर

Riksha
चित्र गूगल से साभार
आज सुबह-सुबह की सच्ची घटना है। एक सूटेड बूटेड आदमी के पीछे एक रिक्शा वाले को गिडगिडाते हुये जाते देखा। उन शरीफ  दिखने वाले सज्जन का नाम फत्तू रख लेते हैं। फत्तू की पुरानी दिल्ली के खारी बावडी इलाके में दुकान है। घर से आये थे दुकान पर, रिक्शे वाले से लाहौरी गेट तक आठ रुपया किराया तय हुआ। वैसे आजकल रिक्शे वाले पाँच एकम पाँच, पाँच दूनी दस के पहाडे के हिसाब से रेट रखते हैं। पता नहीं सुबह-सुबह  बोहनी का समय और पहला ग्राहक वापिस ना जाये, शायद इसलिये इस रिक्शे वाले ने थोडी ना-नुकर के बाद आठ रुपया लेना तय कर लिया होगा। फत्तू ने भी खूब बहस की होगी, दस से आठ रुपया में आने के लिये। (यह मेरा अन्दाजा है) खैर रिक्शा वाला उन्हें लाहौरी गेट लेकर आया। फत्तू ने रिक्शे वाले से पहले दो रुपये वापिस मांगे। (डेढ सयाने लोग अपने पैसे देने से पहले बाकी की माँग पहले करते हैं) रिक्शे वाले के पास खुले (छुट्टे) दो रुपये थे नहीं। फत्तू से दस का नोट लेकर रिक्शे वाला कई दुकानों और पान-बीडी वालों के पास गया। लेकिन किसी ने उसे 10 रुपये  के छुट्टे नहीं किये। अब सुबह-सुबह और रिक्शे वालों को कोई  छुट्टे दे देगा, इसकी उम्मीद ना के बराबर ही है। तो फत्तू ने रिक्शे वाले से अपना दस का नोट वापिस लिया और चल दिया। रिक्शे वाला गिडगिडाता जा रहा था-बाऊजी मैं कोशिश कर रहा हूँ, कोई ना कोई छुट्टे दे ही देगा। लेकिन फत्तू ने उस परे धकेला और बिना एक रुपया भी दिये अपने रास्ते चल दिया। बेचारा रिक्शा वाला अपनी रिक्शे के पास आकर बुदबुदाते हुये फत्तू को गालियां देने लगा।
अब आप बतायें क्या एक गरीब रिक्शे वाले की मजदूरी छीनना गुण्डागिरी नहीं है। जो लाखों कमाने वाला व्यापारी अपने दो रुपये छोडने के बजाय रिक्शे वाले के आठ रुपये छीन ले गया हो तो कैंसर किसे होगा, रिक्शे वाले को या फत्तू को। क्या फत्तू को खुद छुट्टे करवा कर रिक्शे वाले की मजदूरी नहीं देनी चाहिये थी। फत्तू दो रुपये की टॉफी या माचिस आदि भी खरीद कर छुट्टे करवा सकता था।

अब दूसरी बात बंटी चोर के लिये है। बंटी चोर जी अभी कुछ देर पहले आपने मेरी कौवा चला हंस की चाल और चाय पानी वाली पोस्ट पर टिप्पणी की है। दोनों में आपने ताऊ पहेली का उत्तर बताने वाली पोस्ट की लिंक दी है। मेरी नजर में यह बेहूदगी है और मैं अपने ब्लॉग से ये टिप्पणी हटा रहा हूँ।  जैसे ही मुझे आपकी टिप्पणी दिखायी देगी हटा दूंगा ताकि दूसरे पाठक भी आपके ब्लॉग पर विजिट ना कर सकें। इसलिये इस प्रकार की टिप्पणी करने के लिये कृपा करके किसी दूसरी चौखट या जंगले (खिडकी) पर समय जाया करें। "मुझे शिकायत है" पर आई आपकी टिप्पणी हटाने में असमर्थ हूँ, इसलिये श्री राज भाटिया जी से अनुरोध करना चाहूँगा कि कृप्या बंटी चोर की टिप्पणी को हटा दें।

12 comments:

  1. aaj kal yese fattu aur choro ka hi jamana hai sir
    pranam

    ReplyDelete
  2. lala ji dele nahi denge bhali de dange .

    ReplyDelete
  3. आपके विचारों से सहमत हूँ .... आभार

    ReplyDelete
  4. फत्तू सेठ और बंटी चोर कया बात ,रब ने बना दी जोड़ी | एक चोर दूसरा डाकू |

    ReplyDelete
  5. इस बंटी चोर ने मेरे ब्लॉग पर भी वो कमेँट किया था। अपने ब्लॉग में वो ऐसे ही कई पहेलियोँ के उत्तर सार्वजनिक करता रहता है। पता नहीं वो ऐसा क्यों करता है?

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन प्रस्तुति के लिए धन्यवाद .

    ReplyDelete
  7. नाम इसका चोर है
    पर चुरा नहीं रहा है
    बतला रहा है
    कैसा चोर है
    जरूर भेदिया है कोई
    जिसने घर की लुटिया डुबोई
    इसकी कंप्‍लेन दर्ज कराते हैं
    पर कार्रवाई करेगा कौन
    यह दुश्‍मन है
    या है मित्र
    मानें क्‍या इसे

    ReplyDelete
  8. आपकी पोस्ट बहुत ही सटीक और सामयिक है. फ़त्तु कार्पोरेट प्रतिनिधित्व कर रहा है और रिक्शेवाला तो जनता की भूमिका में है ही. आजकल फ़त्तू टाईप सेठ शोषण कुछ ज्यादा ही करने लगे हैं यानि मूल में भी धूल कर रहे हैं.:)

    रामराम

    ReplyDelete
  9. अन्तर जी, आगे से चुपचाप चोर की टिप्पणी हटा दें।
    पोस्ट पिखने से ऐसे लोगों को बल मिलता है।

    ReplyDelete
  10. कोई बात नहीं, फत्तू के यहां भगवान बिक्री विभाग या आयकर विभाग का इंसपेक्टर भेज देगा...

    ReplyDelete
  11. सोहेल जी ..बहुत गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डाला है ..शुक्रिया
    आपने मेरे ब्लॉग पर शेर सुधार के लिए कहा था , मैंने सुधार कर दिया है ..पढ़ कर बताना ..शुक्रिया

    ReplyDelete

नमस्कार, आप सब का स्वागत है। एक सूचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हैं, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी है तो मॉडरेशन चालू हे, और इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा। नयी पोस्ट पर कोई मॉडरेशन नही है। आप का धन्यवाद, टिपण्णी देने के लिये****हुरा हुरा.... आज कल माडरेशन नही हे******

मुझे शिकायत है !!!

मुझे शिकायत है !!!
उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए, उन्हें बहू भी मत दीजिये।