आज की अन्ताक्षरी शुर करने से पहले आप सब से एक प्राथना है कि आप एक तो अपनी दिये गीत हटये( डीलिट) ना करे, दुसरा जब बहुत से लोग इकट्टॆ गीत देते है , तो उस समय थोडा सब्र रखे, झुझलाये नही, गुस्सा ना करे, याद करे जब हम बचपन मै इस आंताक्षरी को खेला करते थे, तो कितना शोर मचता था, ओर जितने ज्यादा लोग होते थे, शोर भी उतना ही मचता था, लडाई भी होती थी, फ़िर हम लडाई की उस जड को खोज कर आंताक्षरी वही से शुरु करते थे, जहां कुछ गलत हो जाता था, बस वेसा ही कुछ इस आंताक्षरी मजा आये यही मेरा मकसद है,
आज निर्मला जी ओर संगीता जी ओर ताऊ से लगातार खुब आंताक्षरी खेली, बीच बीच मै महक जी , प्रकाश जी ओर बहुत से साथी आते रहे, बस आप सब से यह विनती है कि झुझलये नही मजा ले, सच कहूं तो बहुत मजा आता है, मेरे बच्चे ओर बीबी भी जल्दी जल्दी से उस अक्षर से गीत ढुढते है, ओर जब मिल गया तो हमारे लिखने से पहले ही दुसरे का मोजूद, ओर फ़िर से ढुढते है... अरे जल्दी अरे जल्दी... यानि पुरा परिवार खुश.
अभी तो मेने ब्लांग से बहुत कुछ हटा दिया ताकि जल्द से चले,मेने कल चेट बक्स लगाया था, लेकिन फ़िर हटा दिया, क्योकि उस से स्पीट कम हो गई थी, ओर फ़िर मुझे चेट बक्स कुछ खास नही लगा, लेकिन कल हमारे नोजवान साथी अन्तर सोहिल जी आये गे, बाकी वो भी कुछ तबदीली करेगे.....
१> अपने गाने के नीचे कृप्या अपने दिये अक्षर को भी " " यानि कोलन के बीच में लिख दें तो नये आने वालों को सुविधा होगी
२> कृप्या जो चेन चल रही है उसे टूटने ना दें, यानि जो टिप्पणी पहले प्रकाशित होती है उसी के दिये अक्षर से ही गाना गाएं
३> अगर एक ही समय मै एक ही शब्द पर दो लोगो ने अलग अलग या एक ही गीत लिख दिया तो जिस का गीत पहले (यानि ऊपर होगा) उसी के गीत से कडी आगे चलेगी
४> ओर आंताक्षरी का समय खत्म होने के बाद भी अगर आप खेल रहे है तो आप का नाम विजेतओ मै नही गिना जायेगा, लेकिन खेल सकते है, पुरे १० बजे भारतीय समय इस आंताक्षरी की समाप्ति का है, हां १,२ मिंट आगे पीछे हो सकते है......
आप सारी रात भी इसे खेल सकते है, मै ओर ताऊ काफ़ी देर तक खेलते रहे, बहुत मजेदार
तो चलिये अब कल के विजेता का नाम कल के विजेता है हमारे ****राम पुरिया ताऊ जी***तालिया.
ओर आज की पहेली फ़िर से एक नये भजन से, उस भजन के आंतिम शव्द से शुरु होगी आज की आंताक्षरी...
मन तड़पत हरि दरसन को आज
मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज
आ, विनती करत, हूँ, रखियो लाज,
मन तड़पत हरि दरसन को आज
"ज" अक्षर से