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3/17/11

जीभ निकालो, चिढ काढो

बहुत मजा आता है किसी को जीभ निकालकर चिढाने में। ट्रेन या बस में किसी  छोटे बच्चे को देखकर मैं तुरन्त जीभ काढ कर उसे चिढाने की कोशिश करता हूँ। बदले में बच्चा अगर बच्चा भी मुझे चिढाने की कोशिश करता है तो, उससे बातें करने का और खेलने का रास्ता अपने आप खुल जाता है। जब हम छोटे थे तो अपने भाई-बहन से या स्कूल में झगडा होने पर आपस जीभ निकालकर और उल्टा-सीधा चेहरा बनाकर चिढाते थे। अब भी कभी-कभी अपने बच्चों के साथ खेलते वक्त ऐसे ही करता हूँ। इस प्रकार उल्टे-सीधे चेहरे बनाने से वातावरण हँसी-खुशी का हो जाता है और चेहरे की माँसपेशियों का व्यायाम भी बहुत अच्छा होता है। आप भी ये तस्वीरें देखिये और इस होली पर  एक-दूसरे को खूब चिढाईये, यकीन मानिये बहुत मजा आयेगा।

8/4/10

हिम्मत हो तो मोत से भी आदमी लड सकता है.....

आज फ़ेश बुक पर मुझे एक विडियो मिला, जो मेरे विचारो से पुर्णता मेल खाता है, मै हमेशा कहता हुं कि हमे आखरी दम तक अपने हक के लिये लडना चाहिये, ओर अगर समानए मोत भी खडी हो तो भिड जाना चाहिये, जीत हिम्मत करने वालो की होती है, यकिन ना हो तो यहां देखे........

2/4/10

हैंड पर धर देता हूं हैंडफ्री

पिछली चिट्ठी हैंड पर धर दिया था हैंडफ्री में मैंनें कहा था -
"कुछ लोग तो आवाज कम करने की बात कहने पर झगडने लगते हैं। आप बतायें ऐसे लोगों का क्या किया जा सकता है?????"
इस बारे में आप सबका अमूल्य विचार और सलाह देने के लिये हार्दिक धन्यवाद। आप सभी मित्रों के कहे अनुसार प्रेम और अनुरोध ही इस समस्या का सही समाधान है।
अब मैं अपने पास एक हैंडफ्री जरूर रखता हूं और जैसे ही कोई पास बैठा व्यक्ति तेज आवाज में गाना बजाता है, तो उसे हैंडफ्री देकर कहता हूं कि अगर आपके पास हैंडफ्री नही है तो आप इसका उपयोग कर सकते हैं। मेरी वाली हैंडफ्री बेशक किसी के फोन के अनुकूल ना हो, तब भी सामने वाला समझ जाता है और खुद-ब-खुद आवाज कम कर लेता है। अगर उसके पास अपनी हैंडफ्री है तो वह उसका सदुपयोग करने लगता है।
मुझे Dr. Smt. ajit gupta जी की यह सलाह बहुत पसन्द आयी - 
"अब कोई बजाएगा तो उससे पूछ लेंगे कि क्‍यों भाईसाहब आपका मोबाइल मेड इन चाइना है क्‍या? यदि वह बोलेगा कि नहीं तो, तो आप कहेंगे कि इतनी तेज आवाज तो चाइना के मोबाइल की ही होती है"
आदरणीय संजय बेंगाणी जी की टिप्पणियां पढना (किसी भी पोस्ट पर) मुझे बहुत भाता है, क्योंकि उनकी बात कम शब्दों में और दो टूक होती है। लेकिन यह वाली बात मैं समझ नही पाया, या यूं कह सकता हूं कि मेरे विचारों से मेल नही खाती है - 
"अपने से कमजोर हो तो धमाकाओ, ताकतवर हो तो बिनती करें..."
अपनी इस टिप्पणी के लिये मैं क्षमाप्रार्थी हूं - 
"आदरणीय संजय जी
क्या यह सामंती फार्मूला सही रहेगा।
कमजोर और ताकतवर को कैसे परिभाषित करेंगें? हल्के-पतले शरीर वाले भी आक्रामक हो सकते हैं। उनके साथ ग्रुप हो सकता है।
(वैसे आज के समय में हथियारबंद और समूह ही ताकतवर है)
दूसरी बात जो ताकतवर है, जरुरी नहीं कि वो विनती सुनेगा। ज्यादा चांस यही हैं कि वो अपने मनोरंजन के बारे में ही सोचेगा"

10/16/09

बर्फ़ी घर पर ही बनाईये

आज कल हर तरह हर चीज नकली नकली ओर नकली, अब किस किस चीज से बचा जाये? अजी अगर आप साबधान रहे तो बहुत सी चीजो से बचा जा सकता है, जेसे पानी, अगर घर पर ही उबाल कर पीये तो, बाहर के खाने से परहेज करे, समोसे, कचोडी सब खाये लेकिन घर पर बना कर, अरे क्या कहा समय नही? अजी समय तो बहुत है, लेकिन आप बनाना नही चाहते, सोचिये अगर आप कि भयानक बिमारी से घिर गये तो... कितना समय होगा पछताने के लिये? अजी बिमार आप के दुशमन भी ना हो, अगर दुशमन बिमार हो गये तो लडे गे किस से....

चलिये अब करते है काम की बात, हम यहां पर हर भारतीय व्यंजन घर पर ही बनाते है, लेकिन हमे कई साल लगे तब धीरे धीरे बहुत कुछ बनाना आ गया, तो लिजिये आप को आज बर्फ़ी बनाना सिखाते है, ताकि आप कल दिपावली पर घर की बनी मिठाई बच्चो को खिलाये... अजी कोई ज्यादा समय नही लगता, ओर बर्फ़ी भी बाजार से स्वाद, ओर बिमारी का कोई डर भी नही, तो बनाये?
आप को इस के लिये सामग्री तो असली ही लेनी पडेगी ना..
सामग्री...
तीन लीटर शुद्ध दुध(आप कम भी ले सकते है फ़िर उसी अनुपात मै अन्य सामग्री भी कम करते जाये)
चीनी स्वाद अनुसार
मिल्क पाऊडर २०० से २५० ग्राम
करीम २०० ग्राम
इलाय्ची स्वाद अनुसार( इलायची का बारीक पाऊडर बना ले)
मेवे अगर डलाना चाहे तो स्वाद अनुसार
**********
बिधि....
सब से पहले दुध को अच्छी तरह से उवाल ले( ताकि उस मे मोजूद कीटाणू मर जाये)
फ़िर दुध को फ़ाड कर इस का पनीर बना ले, ओर पनीर का पानी निकल दे फ़िर उसे अच्छी तरह से मसल कर भुर भुरा बना ले फ़िर इस को किसी खुले बरतन मै डाल ले इस के ऊपर आप करीम डाल दे, ओर फ़िर उस मै मिल्क पाऊडर डाल दे ओर हाथ से इस सब सामग्री को अच्छी तरह मले, अगर यह हाथो से चिपके तो इस मै ओर मिलक पाऊडर डाले, ओर इसे आटे की तरह से खुब गुंधे, या फ़िर मिकसर मै डाल कर काफ़ी देर तक इसे आपस मै मिलने दे.अब इसे फ़िर्ज मै एक दिन रखे( अगर जल्दी है तो कम से कम १०, १२ घंटे रखे, लिजिये आप का खोया तेयार है.

अब इस खोये की बर्फ़ी बनाने के लिये इस खोये को फ़िर से भुर भुरा बनाये, केसे इस खोये मै स्वाद अनुसार चीनी डाले ओर साथ साथ मै इसे मसलते रहे फ़िर किसी मोटे तले के बरतन मै इसे आंच पर रखे ओर हिलते रहे, ध्यान रखे नीचे ना लगे, अब यह पिघल जाये गा , इसे उतार कर थोडा इन्तजार करे, जब गुनगुना रह जाये तो इसे किसी मिक्सर मै डाल कर मिकसर को अच्छी तरह से चलाये, फ़िर इसे पहले बाले बरतन मै डाल कर फ़िर से गर्म करे,ओर इस मै मेवे केसर, ओर इलायची डाल दे, जब आप को यकीन हो जाये कि अब यह जम सकता है तो इसे किसी ट्रे बगेरा मै डाल कर कुछ समय के लिये रख दे, अगर जल्दी है तो इसे फ़िर्ज मै रखे, बस अब इसे काट काट कर मन पसंद रुप दे, जनाब आप की बर्फ़ी तेयार, बिलकुल शुद्ध

साथ साथ चीनी चेक करते रहे, गर्म गर्म मै चीनी हमेशा कम लगती है,ट्रे मै जमाने के समय भी आप इस पर मन पसंद की सामग्री डाल सकते है जेसे पिस्ता, इलायची,मेवे बगेरा, यह बाजार से सस्ती पडेगी ओर समय भी करीब एक से डॆढ घंटा लगता है, ओर सब से बडी बात यह बाजार से सॊ गुणी स्वाद बनेगी.

तो भाई बनाईये या बनाबईये घर पर, ओर खाईये... ओर खिलाईये

9/27/09

मुझे शिकायत है, उन ब्लांगर से जो...

भाई मुझे बहुत शिकायत है उन ब्लांगर से जो बिना बात एक दुसरे की टांग खींचते है, किसी का लेख, कविता, कोई विचार आप को नही पसंद तो आप उसे मत पढे, लेकिन उस के ब्लांग पर जा कर वेहुदा भाषा मै गाली गलोच करना, धमकिया देना,किसी के धर्म पर बिन बात तोहमत लगाना, उचित नही,अगर मुझे अपने धर्म मे कोई कमी दिखती है तो मै सिर्फ़ अपने धर्म के बारे ही लिखू, मुझे कोई हक नही दुसरे की फ़टी मै अपनी टांग अडाऊ, इस से सभी ब्लांगर आपस मै बंट जाते है, कोई हिंदु तो कोई मुसलिम बन जाता है.ओर हमे दुसरे के किसी भी लेख पर कोई अपति है तो उसे मेल करे, ना कि उस के लेख को निशाना बना कर अपने ब्लांग पर दुसरा लेख ठोक दे.क्या हमे आपस मै मिल बेठ कर कोई भी काम नही आता ?आओ हम सब सिर्फ़ वो बात करे जो सिर्फ़ हमारे समाज से हो, ना कि हमारे धर्म से,ओर हम एक दुसरे की टांग ना खिचें..ब्लांग को साफ़ सुधरा रखे.
आईये आप कॊ एक किस्स सुनाता हुं...

एक बार एक भारतीय मर गया, जब उसे यम राज के पास ले जा रहे थे, तो रास्ते मै नरक आता था, वहां अलग अलग कुये थे, सब से पहले जर्मन लोगो का कुआं था, कुये के बाहर बहुत सारे पहरे दार बेठे थे, जिन के हाथो मे तलवारे ओर भाले थे,पुछने पर पता चला कि जब यह लोग भागने की कोशिश करते है तो पहरे दार इन्हे दोवारा नीचे फ़ेंक देते है.
अगला कुआं था इगलेंड का वहां पर भी कुआ खुब गहरा ओर पहरे दार भी, उस से अगला कुआं अमेरिका का..... चलते चलते आगे भारत का कुआं भी आ गया, अपने नरक के कुयें को देख कर भारतीया बहुत खुश हुया, वो कुआं ज्यादा गहरा भी नही था, ओर कोई पहरे दार भी नही था,ओर अंदर से गंदी गंदी गालियो की आवाजे आ रही थी, भारतिया भाई बहुत खुश हुये, ओर यम के दुत से बोले वो सामने तो भारत का ही कुआं है ना? दुत ने हां मै सर हिला दिया.

भारतीया भाई बोला देखा हम लोग कितनी भगति करते है, हमारे देश मै हर गली मै मंदिर, मस्जिद, गुरुदुवारे ओर गिरजाघर है, ओर ऊपर वाले ने खुश हो कर, हम पर भरोसा कर के कुआं भी कम गहरा बनबाया है, ओर कोई पहरे दार भी नही रखा..... दुत थोडा मुस्कुराया, ओर बोला नही यह बात नही... यहां पहरे दार इस लिये नही कि जब एक भागने लगता है तो दुसरा उस की टांग खींच लेता है..... ओर सदियो से यह यही सड गल रहे है, बाकी कुऒ मै लोग एक दुसरे की मदद कर के, एक दुसरे को सहारा दे कर ऊपर चढ जाते है, ओर जो भी इस कुये की मुडेर पर चढ जाये वो इस नरक से बाहर आ जाता है, लेकिन भारत का एक भी आदमी आज तक बाहर नही आया...

तो भाईयो आओ ओर हम एक दुसरे का साहारा बने, ना कि एक दुसरे की टांग खींचे

6/13/09

मां से बडा कोन ??

मां ऎसी है, तो कया बेटा बडा हो कर मां के संग ऎसा करता है??? भीग रही है, बोझा ढो रही है, फ़िर घर जा कर पहले बच्चे के जुत्ते उतारेगी मोजे उतारे गी, सुखे कपडे पहनाये गी, फ़िर उससे खाना देगी तब जा कर अपनी सुध लेगी, क्या हम अपनी मां की सुध लेते है, क्या मां का कर्ज चुका सकते है, क्या मां को अपने बडे से मकान मे किसी एक कोने मै इज्जत से स्थान दे सकते है, अगर नही तो कल आप के बच्चे भी आप के संग यह सब करेगे, इस लिये अभी से आप सोच ले...... ओर यह चित्र किसी अन्य मां का नही हमारी सब की मां भी ऎसी ही है, हमे ऎसे ही पाला है, खुद भीग कर, खुद भुखी रह कर, खुद कंजुसी कर के हमारी जरुरते पुरी करने वाली यह नारी जिसे हम मां पुकारते है, कभी इस की पुजा की है, इस मां से बडा कोई भगवान नही, कोई ओर माता नही, यही है माता रानी इसे नाराज मत करो.... आओ अपने मां बाप कॊ अपने संग रखो, उन की इज्जत करो तुम्हारी पहचान वोही है, उन के सिवा तुम, हम कुछ नही।चित्र कही से मिला तो इसे देख कर बस युही कोई विचार मन मै आया तो उन्हे शव्दो का रुप दे कर मन की बात यहा लिख दी, अच्छी लगे तो ठीक वरना माफ़ करना

1/19/09

तिरंगा

मेरा भारत महान


आप झंडे का कोड यहां से कापी कर के अपने ब्लांग पर डाल सकते है. बिलकुल आसन है, आप इसे कापी करे के ,आप ने इसे HTML विजिट मे डाल दे, फ़िर देखे

11/2/08

काम की बाते

एक मिनी पोस्ट
मनुष्य क्रोध को प्यार से, लोभ को दान से, झुठ को सत्य से ओर पाप को सदा चार से जीत सकता है।
गोतम बुद्ध

10/28/08

काम की बाते

एक माईक्रो पोस्ट...
माचिस की तीली का सिर तो होता है, लेकिन दिमाग नही,इस लिये वह थोडी सी रगड से जल उठती है.
हमारे पास सिर भी है, ओर दिमाग भी, फ़िर हम क्यो छोटी सी बात पर इतना उतेजित हो जाते है???

मुझे शिकायत है !!!

मुझे शिकायत है !!!
उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए, उन्हें बहू भी मत दीजिये।