Showing posts with label अन्तर सोहिल. Show all posts
Showing posts with label अन्तर सोहिल. Show all posts
6/20/12
निर्मल बाबा केवल एक नहीं है : अन्तर सोहिल
इंदु आहूजा, लाल किताब वाले गुरूदेव और अन्य बहुत सारे ज्योतिष बताने और यंत्र बेचने वाले टीवी चैनलों के जरिये धर्मांध जनता को शोषित कर रहे हैं। कई बार तो लगता है कि हिन्दु ही इतने अंधे हैं या कोई षडयंत्र चल रहा है। लगभग सभी के सभी हिन्दुओं से जुडी धार्मिक भावनाओं और मान्यताओं के आधार पर दोहन करते हैं। जैसे धन बढाने के लिये लक्ष्मी यंत्र आदि।
दूसरे चैनलों के साथ-साथ न्यूज चैनल भी विज्ञापनों के नाम पर धन कमाने के लिये इन अंधविश्वासों को बढावा दे रहे हैं। सभी गुरू और यंत्र बेचने वाले मानव प्रजाति को हर दुख-क्लेश से छुटकारा दिलाने और ग्रहदशा के प्रभाव को बदलने का प्रयास करते और आसान उपाय बताते हैं।
क्या विज्ञापनों के नाम पर दिखाये जाने वाले, अंधविश्वास फैलाने वाले और केवल एक फोन कॉल पर (इनकी फोन कॉल 12 रुपये प्रति मिनट होती है) हर दुख दूर करने का दावा करने वाले इन कार्यक्रमों पर रोक नहीं लग सकती है।
अगर आप इन बाबाओं पर विश्वास करते हैं और अपना ब्लॉग भविष्य सुखद चाहते हैं तो ताऊ बाबा, टिप्पल बाबा और आसमानी बाबा के दरबार में भी हाजिरी लगा लीजिये।
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल,
शिकायत,
समस्या
1/7/12
डॉo रूपचंद्र शास्त्री जी का फोन बजता रहा
डॉo रूपचंद्र शास्त्री जी का फोन बजता रहा, लेकिन उन्होंने पिक नही किया। दिनेशराय द्विवेदी जी (बारहा में ये शब्द और द्वारा लिखना कोई सिखा दे मुझे, मेहरबानी होगी) अस्वस्थ थे फिर भी इंतजार था। डॉo टी एस दराल जी
का तो खासतौर पर इंतजार था, क्योंकि उनसे तो मंच पर बहुत सारी व्यंग्य
रचनायें सुननी थी। (डॉo साहब के मन में कुछ है, जाने कब बतायेंगे, ना आने
का कारण).........................पूरा पढें..
नाम
Antar Sohil,
sampla,
sapla,
अन्तर सोहिल,
सापला,
सांपला
1/3/12
ब्लॉगर्स का सम्मान सांपला सांस्कृतिक मंच से
![]() | |||
| श्री पद्मसिंह जी स्मृति चिन्ह भेंट करते हुये अन्तर सोहिल |
![]() |
| इंदु मां को स्मृति चिन्ह भेंट संजय जी (मंजे) द्वारा |
![]() |
| श्री राजीव तनेजा जी को स्मृति चिन्ह भेंट अश्वनी जी द्वारा |
![]() |
| श्री राज भाटिया जी को स्मृति चिन्ह भेंट कर रहे हैं विक्की जी |
![]() |
| श्री यौगेन्द्र मौद्गिल जी सौरभ जी और बीच में हैं डॉ० राजेश वशिष्ठ जी |
![]() |
| श्री अलबेला खत्री जी का स्वागत करते हुये हैप्पी जी |
![]() | |
| श्री अलबेला जी को स्मृति चिन्ह देते हुये नवीन भूटानी जी |
![]() |
| श्री पद्मसिंह जी का सम्मान करते हुये अन्तर सोहिल |
नाम
Antar Sohil,
sampla,
sapla,
अन्तर सोहिल,
चित्र,
सापला,
सांपला
12/22/11
ब्लॉगोत्सव में टोपी, मफलर साथ लायें
जी नहीं सांपला कोई हिल स्टेशन नही है, लेकिन पिछले ३-४ दिनों से बढती ठंड ने टोपी, मफलर को अनिवार्य कर दिया है। और रात के समय ७:०० बजे से १२:३० बजे तक कवि सम्मेलन में बैठना है तो जितनी एहतियात बरती जाये, उतना अच्छा रहेगा।
ब्लॉगोत्सव में केवल एक दिन बाकी है । मैं तो बहुत उत्साहित हूं, जो ब्लॉग्स रोज मेरी नजरों के सामने होते हैं, उनके लेखक मेरे सामने होंगें। श्री अलबेला खत्री जी इसी दिन अपनी नयी ऑडियो एलबम "हे हनुमान बचा लो" का विमोचन भी सांपला ब्लॉगर्स मीट में करवाने की सोच रहे हैं। तो आप अभी से प्लानिंग करलें कि हनुमान जी के बेहतरीन भजनों की कितनी सीडी आपने अपने लिये और दोस्तों-रिश्तेदारों को गिफ्ट करने के लिये खरीदनी है। एक सीडी केवल २५/- लागत कीमत पर आपको उपलब्ध करवाई जा सकती है।
इसके अलावा ब्लॉगर्स मिलन में नये लोगों को भी ब्लॉग बनाने, ब्लॉग की जरुरत, उपादेयता, समाज में ब्लॉगिंग का स्थान, अहमियत और आचार आदि के बारे में बताने, सिखाने की जिम्मेदारी आप ब्लॉगर्स की होगी.
आयोजन, स्थल, रास्ते, समय और आने वाले ब्लॉग महारथियों के ब्लॉग सहित नाम और विस्तृत जानकारी के लिये नीचे दिये लिंक्स पर क्लिक करें।
![]() |
| Sampla Sanskritik Manch |
.
नाम
Antar Sohil,
sampla,
sapla,
अन्तर सोहिल,
कविताओ की गंगा,
सापला,
सांपला
11/29/11
FDI और कांग्रेस सरकार या जहांगीर दरबार
खुदरा व्यापार का मेरे आसपास के (हरियाणा) गांव-देहात में एक ट्रेंड है। आम आदमी खुदरा दुकानदार से पूरा महिना घरेलू सामान खरीदता है। महिने पर तनख्वाह मिलने पर पेमेंट करता है। किसान भी खाद-बीज और घरेलू सामान छोटे दुकानदार से खरीदता रहता है और फसल आने पर अपना उधार चुकता करता है। अब खुदरा व्यापार में 100% विदेशी पूंजी निवेश को मंजूरी देने से विदेशी कम्पनियां भारत में अपनी दुकानें खोलेंगी। उधार देने के लिये भी विदेशी बैंक अपने क्रेडिट कार्ड जबरदस्ती जनता को थमाये दे रहे हैं। यानि पूरी तरह अपने जाल में फांसने की तैयारी है।
पहले तो भारत की आज की शिक्षा प्रणाली ही ऐसी है कि स्वव्यवसाय की बजाय नौकर बनना सिखा रही है। विदेशी कम्पनियां आयेंगी यहां के लोगों को नौकर बनायेंगी और राज करेंगी। भारत से पैसा कमा कर विदेशों में ले जाया जायेगा।
वॉलमार्ट जैसी कम्पनियां तो 99% चीनी उत्पादन बेचती हैं। यानि भारत की उत्पादकता को भी खतरा है। चीन ने ऐसी कम्पनियों को अपने देश में चीन का उत्पादन बेचने की शर्त पर मंजूरी दी थी।
ज्यादा समय नहीं लगेगा जब रिटेलर यानि छोटे दुकानदार समाप्त हो जायेंगे और यही कम्पनियां अपने मुँहमांगे दामों पर वस्तुओं की बिक्री करने लगेगी। आज खुदरा दुकानदार किसी वस्तु का अधिकतम खुदरा मूल्य ही वसूल करता है और ये कम्पनियां भी अधिकतम खुदरा मूल्य पर ही अपना माल बेचेंगी तो उपभोक्ता को कैसे फायदा होगा ये मेरी समझ नहीं आ रहा है।
आज मेगा मार्ट, बी बाजार, शॉपर स्टॉप और अन्य ऐसे बडे स्टोर सस्ता बेचने के लिये ज्यादातर रिजेक्टेड, डिफेक्टेड या एक्सपाईरी माल ही बेचते हैं। जिसके बारे में उपभोक्ता को मालूम ही नहीं होता है। उदाहरण के तौर पर कोल्ड ड्रिंक्स बनाने वाली फैक्ट्री को वर्ष में 3-4 महिने के लिये अपना उत्पादन बंद या कम करना पडता है, क्योंकि उत्पादन के अनुसार सर्दियों में मांग नही होती है। तो ये बडी दुकानें इस ऑफ सीजन में अपने ऑर्डर बुक करा लेती हैं और कम्पनियां इन्हें केवल लागत मूल्य पर माल स्टॉक कर देती हैं। मार्च-अप्रैल में मांग आने पर पैकिंग समय और तारिख डाल दी जाती है। वास्तव में यह माल नवम्बर-दिसम्बर में तैयार हो चुका होता है।
सन 1600 के आसपास अंग्रेजों ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना करके भारत में व्यापार करना शुरू किया। अंग्रेज अपने साथ नौकर नहीं लाये थे, बल्कि भारतीयों को ही नौकर बनाया था। उस समय के बादशाह जहांगीर ने अंग्रेजों की प्रार्थना पर ये फरमान भी जारी कर दिया कि अपनी कोठी के किसी मुलाजिम के कसूर करने पर अंग्रेज स्वयं उसे दण्ड दे सकते हैं।
अब इतिहास को दोहराने या ये कहें कि भारत को फिर से अंग्रेजों का गुलाम बनाने देने की तैयारियां शुरु हो गई हैं। सोनिया गांधी पिछले दिनों इलाज करवाने के लिये विदेश गई थी, क्या तभी खुदरा व्यापार में 100% विदेशी निवेश को मंजूरी देने की तैयारी की गई थी।
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल,
शिकायत,
समस्या
11/11/11
कहां है सांपला?
कवि सम्मेलन और ब्लॉगर्स मित्र मिलन
शनिवार, 24 दिसम्बर 2011 को सांपला में हास्य कवि सम्मेलन और ब्लॉगर मिलन
के आयोजन की तैयारियां शुरु हो गई हैं। ब्लॉगर्स मिलन सुबह 11:00 बजे से
शाम 4:00 बजे तक और कवि सम्मेलन शाम 7:00 बजे से आरम्भ होगा। आप सबका
स्वागत है। सांपला एक छोटा सा टाऊन है, जो दिल्ली - हिसार रोड (NH-10) पर
बहादुरगढ और रोहतक के बीच में बसा है। सांपला आने के लिये आपको दिल्ली
करनाल बाईपास या पंजाबी बाग से पीरागढी चौक-नांगलोई-बहादुरगढ के रास्ते आना
है। पूरा रास्ता बहुत बढिया बना हुआ है। पंजाबी बाग से सांपला की दूरी 40
किमी और रोहतक से 23 किमी है। रेलगाडी से आने वालों के लिये दिल्ली से
शकूरबस्ती, नांगलोई, बहादुरगढ से आगे सांपला स्टेशन है। दिल्ली से सडक या
रेल दोनों माध्यम द्वारा अधिकतम 1 घंटे का, 45 किमी का सफर है।
ब्लॉगर्स मित्र मिलन में आने वाले चिट्ठाकारों की सूचि और सभी सूचनायें आपको यहां मिलती रहेंगी, जुडे रहियेगा। अपने उपस्थित होने की और किसी भी जानकारी के लिये आप मुझे 9871287912 पर फोन कर सकते हैं। श्री राज भाटिया जी, श्री अलबेला खत्री जी, श्री यौगेन्द्र मौदगिल जी, श्री संगीता पुरी जी, डॉO टी एस दराल जी, श्री नीरज जाट जी, श्री जाट देवता जी, श्री संजय भास्कर जी, श्री के डी सहगल जी के आने की सूचना मिल चुकी है।
नाम
Antar Sohil,
sampla,
sapla,
अन्तर सोहिल,
रोहतक,
सापला,
सांपला
11/8/11
रु-ब-रु ए ब्लॉगर्स
अन्तर सोहिल का प्रणाम स्वीकार करें
आपके अपने श्री राज भाटिया जी से आप सबकी मुलाकात करवाने की तैयारी हो रही है। श्री राज भाटिया जी 14 दिसम्बर 2011 को भारत पहुँच रहे हैं। 17 से 27 दिसम्बर के बीच में कोशिश की जा रही है ब्लॉगर मित्र मिलन और कवि सम्मेलन का आयोजन सांपला में किया जाये। तो शुभकामनायें दीजिये और तैयारियां कीजिये (मेरा मतलब है नये कपडे वगैरा सिलवा लीजिये) अरे! मित्रों ब्लॉगर मित्र मिलन कोई शादी-ब्याह से कम उत्सव है क्या :-)
नाम
Antar Sohil,
sampla,
sapla,
अन्तर सोहिल,
सापला,
सांपला
8/26/11
मैं गुनहगार हूँ
क्योंकि मैनें ऐसी सरकार को चुना है, जिसके राज में अपने ही देश की संसद के सामने भारतमाता की जय और वंदेमातरम बोलने पर मुँह बंद कर दिया जाता है।
अभी-अभी न्यूज में दिखाया जा रहा है कि रोहतक का रहने वाला मनजीत नामक व्यक्ति संसद के गेट नंO 1 पर खडा था। उसके कपडों पर मैं अन्ना हूँ लिखा था। जैसे ही उसने वंदेमातरम का नारा लगाया, वहां मौजूद सिक्योरिटी ने उसे पकड लिया। ठीक है कि सुरक्षाकर्मी को अपना कर्त्तव्य करना चाहिये और उसे गिरफ्तार करना चाहिये, क्योंकि गेट नंO 1 केवल वी वी आई पी, मंत्रियों और सांसदों के लिये है। शायद संसद की सुरक्षा की दृष्टी से उसे यहां नहीं होना चाहिये था। लेकिन उसे हथकडी पहनाने के बजाये, उसका मुँह बंद करना, बाल खींचना, गर्दन दबोचना क्या उचित है???
मनजीत का मुँह इसलिये बंद किया जा रहा था कि वह भारतमाता की जय और वंदेमातरम के नारे लगा रहा था और अन्ना समर्थक था।
नाम
अन्तर सोहिल,
शिकायत
6/9/11
रामदेव भागे क्यों?
![]() |
| गूगल से साभार |
कुछ लोग बार-बार यही सवाल कर रहे हैं कि बाबा रामदेव 4 जून को रामलीला मैदान से कायरों की तरह भागे क्यों? इस सवाल का जवाब मैं अपनी अल्पबुद्धि से यह सोचता हूँ कि अगर बाबा नहीं भागे होते और जनता उग्र हो जाती तो आप 50-100 के हताहत होने का ठीकरा भी बाबा के सिर पर फोडते, कि बाबा ने कोहराम मचवा दिया। वक्त विचार कर महफूज जगह पर जाकर शक्ति इकट्ठी करना कायरता नहीं है। महाराणा प्रताप या लक्ष्मीबाई को भी कायर कहेंगें क्या? उन्हें भी कई बार छुपना पडा था।
![]() |
| गूगल से साभार |
दूसरी बात बाबा कोई राजनेता नही हैं। उनके पास वह लोमडी वाली खोपडी भी नही है। मुझे लगता है उनके पास सलाहकारों और वकीलों की फौज भी नहीं है, जो उन्हें हर कदम पर उचित सलाह दे सके। और ऐसे वक्त में खुद सोच-विचार करना मुश्किल सा होता है। आसपास के लोगों के कहने से जो सही लगा, उन्होंने वही किया।
अन्तर सोहिल का प्रणाम
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल
3/17/11
जीभ निकालो, चिढ काढो
बहुत मजा आता है किसी को जीभ निकालकर चिढाने में। ट्रेन या बस में किसी छोटे बच्चे को देखकर मैं तुरन्त जीभ काढ कर उसे चिढाने की कोशिश करता हूँ। बदले में बच्चा अगर बच्चा भी मुझे चिढाने की कोशिश करता है तो, उससे बातें करने का और खेलने का रास्ता अपने आप खुल जाता है। जब हम छोटे थे तो अपने भाई-बहन से या स्कूल में झगडा होने पर आपस जीभ निकालकर और उल्टा-सीधा चेहरा बनाकर चिढाते थे। अब भी कभी-कभी अपने बच्चों के साथ खेलते वक्त ऐसे ही करता हूँ। इस प्रकार उल्टे-सीधे चेहरे बनाने से वातावरण हँसी-खुशी का हो जाता है और चेहरे की माँसपेशियों का व्यायाम भी बहुत अच्छा होता है। आप भी ये तस्वीरें देखिये और इस होली पर एक-दूसरे को खूब चिढाईये, यकीन मानिये बहुत मजा आयेगा।
नाम
Antar Sohil,
अच्छी बाते,
अन्तर सोहिल,
मजाक
3/7/11
तम्बाकू आदि पर बैन लगाने से क्या होगा
तम्बाकू, धूम्रपान, गुटखा, पान मसाला आदि पर बैन लगाने से कुछ नहीं होगा। गुजरात में शराब पर बैन है, लेकिन आज वहां शराब की होम डिलिवरी हो रही है। खूब आराम से शराब मिल जाती है और गैरकानूनी कार्य करने वाले चांदी कूट रहे हैं। यही हाल गुटखा, खैनी आदि का भी होने वाला है। चोरी-छुपे फैक्टरियां चलेंगी, व्यापारी दूना कमायेंगें, सरकारी अफसर कमायेंगें। बिक्री तब भी होगी।
इससे बढिया तो सरकार को ऐसी वस्तुओं पर 4000-5000 प्रतिशत के हिसाब से टैक्स लगा देना चाहिये। यानि तम्बाकू, गुटखा, शराब, सिगरेट, बीडी आदि 50पैसे मूल्य की चीज कम से कम 20रुपये की बिके, 200 रुपये की दारू 8-10हजार की बिके। बिक्री होगी तो सरकार की जेब में जायेगा और ना बिके तो जनता की सेहत बनी रहेगी। जो इतने महँगे शौक रखेगा, वो महँगा इलाज भी करा सकता है।
व्यापार और कर विभाग को ज्यादा सख्त बनाया जा सकता है कि कोई मैन्यूफैक्चर कर चोरी ना कर सके।
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल,
शिकायत
2/7/11
क्षमा बडन को चाहिये
@ आदरणीय श्री शिवम मिश्रा जी
आपकी टिप्पणी से मस्तिष्क के पेंच खुल गये हैं। मैंनें उक्त लिंक पर जाकर नहीं देखा। आपका कार्य सराहनीय है और इसमें निरन्तरता बनी रहे, ऐसी आशा रखता हूँ। हालांकि आदरणीय डाO टी एस दराल जी ने बात साफ कर दी थी कि थोडा पोस्ट के बारे में भी कमेंट कर दें तो अच्छा लगेगा। मैं नहीं मानता कि मैनें किसी दूसरे की रचना को अपने ब्लॉग पर पब्लिश किया है तो बेहतरीन लेखन के लिये मैं हकदार हूँ। खैर आपको खेद हुआ है तो, उसके लिये आपसे हाथ जोडकर क्षमाप्रार्थी हूँ।
मैनें आपका नाम लेकर पोस्ट जरुर बना डाली है, लेकिन दूसरों तक भी पहुँचाने के लिये और यकीन मानियेगा इससे टिप्पणियों में विविधता जरुर आयेगी।
आपने तो मेरी ही बात को बदल कर कह दिया :)
सही कहा जी श्री शिवम मिश्रा जी का ब्लॉग वार्ता पर चर्चा वाला काम और इतनी बढिया तरीके से मुझे समझाना वेरी नाईस ही तो है और मेरा मेरे मन में आये किसी विचार पर सभ्य तरीके से सवाल करना भी मैं नाईस ही मानता हूँ।
बिल्कुल पोस्ट ही है जी, पत्र बिल्कुल नहीं है। श्री शिवम मिश्रा जी को सम्बोधित करके ये बात मैनें सभी के लिये कही है कि एक जैसी टीप पढकर (और पोस्ट से सम्बन्धित एक लाईन भी नहीं) कैसा महसूस हो सकता है। उन्होंने मेरी शिकायत का उत्तर बेहतर और विस्तृत दिया है, फिर भी एक प्वायंट ऐसा छूट गया जिस पर किसी ने भी कुछ नहीं कहा।
प्रचार वाली बात लिखने के लिये मैं एक बार फिर से क्षमा मांगना चाहूंगा।
प्रचार वाली बात लिखने के लिये मैं एक बार फिर से क्षमा मांगना चाहूंगा।
आपकी दूसरी बात उम्मीद से दुगना वाली तो अब भी हजम नहीं हो रही है जी। और होगी भी नहीं कहते हैं ना …… को घी हजम नहीं होता। इसमें …… की गलती नहीं होती घी खिलाने वाले की होती है। और हाँ इसके लिये अहसान का टोकरा भी …. के सिर पर नहीं रखना चाहिये। बात बिल्कुल स्पष्ट हो गई है जी और आशा करता हूँ कि आपका आशिर्वाद हमेशा बना रहेगा।
अजय झा जी दिल से एक बात कहना चाहता हूँ कि आपसे संवाद बहुत मजेदार होता है और आपकी टिप्पणी सबसे उम्दा होती हैं। इस टिप्पणी को पाकर बहुत अच्छा लगा। उपरोक्त दो खट्टी लाईनों के लिये आप भी क्षमा कर दीजियेगा छोटा भाई या मूढ समझकर। मिटा भी सकता हूँ, लेकिन अब लिख दिया तो लिख दिया। मिटाने पर खुद से ही मुँह छिपाना होगा।
आदरणीय शिकवे-शिकायत भी खुद से बडों को ही की जाती है। और अग्रणी ही उचित ढंग से समझाते हैं और समाधान करते हैं।
बिल्कुल, मैं भी उत्साहित हो (गया) जाता हूँ। मैनें कब कहा कि इसमें कोई बुराई है? लेकिन एक दो शब्द पोस्ट विषय पर भी हो तो……………॥
मेरा भी ऐसा ही है जी, अगर मुझे लगातार चार पोस्ट बहुत पसन्द आती हैं तो चारों पर बेहतरीन ही लिखूंगा। क्योंकि कई बार अन्य शब्द ही नहीं मिलते कहने के लिये और मेरा शब्दकोष तो बहुत छोटा है।
अन्तर सोहिल का प्रणाम
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल
2/5/11
बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई !
आदरणीय शिवम मिश्रा जी नमस्कार
आपकी एक ही टिप्पणी हर जगह दिखाई देती है। क्या कारण है कि आप किसी भी पोस्ट के सम्बन्ध में कुछ कहने के बजाय यही दो लाईनों को कॉपी पेस्ट करते रहते हैं।
बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई !
आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।
इससे ऐसा लगता है कि आप पोस्ट को पढे बिना ही केवल अपना लिंक देने के लिये और प्रचार के लिये टिप्पणी कर रहे हैं।
अन्तर सोहिल का प्रणाम स्वीकार करें
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल,
शिकायत
1/27/11
ये फोटो देखकर आप कुछ कहना चाहेंगें?
ये अखबार कल 26 जनवरी 2011 के हैं। दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, द ट्रिब्यून, इनमें टाटा डोकोमो वालों ने देश को शुभकामनायें दी हैं। इन अखबारों के सम्पादक अपनी आंखें खुली रखते हैं या बन्द?
सांपला में 23 जनवरी को तिरंगा उत्सव पर हल्का हसनगढ (यह हल्का अब भूपेन्द्र हुड्डा सरकार ने समाप्त कर दिया है) से पूर्व विधायक नरेश मलिक ने भी अपने भाषण में शहरवासियों को 61वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें दी थी :-)
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल,
शिकायत
12/28/10
तिलयार तिलयार तिलयार : अन्तर सोहिल
हंगामा मचा रखा है, इस मीट के नाम पर। किसी के कहने से ही पोस्ट लिखी जाती है और फिर किसी के कहने से मिटा भी दी जाती है। (आधी अधूरी पोस्ट, बिना टाईटल की) "समाज मे स्थापित मानदंडो मे एक ये भी था की स्त्री को पुरुष को कुछ भी समझाने का अधिकार नहीं हैं । लेकिन आज ऐसा नहीं हैं।" आपकी ये लाईनें सही नहीं है। स्त्री द्वारा पुरुष को समझाने का अधिकार पहले भी था और अब भी बिल्कुल है। मुझे आज तक मेरी माँ और बडी बहनों द्वारा ही समझाईश दी जाती रही है और हम सुनते (अब पत्नी की भी) भी हैं और समझते भी हैं।
एक बात पक्की है कि ये ब्लॉगर मीट सचमुच सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने के कारण सभी ब्लॉगर मीट से सुपरहिट हो गई। :-) जो है बदनाम उसका भी बडा नाम है। लेकिन एक बात सोचने वाली है कि इस मीट को बदनाम करने के लिये कोई साजिश तो नहीं है या किन्हीं खास 2-3 ब्लॉगर से व्यक्तिगत वैचारिक रंजिश के कारण ऐसा किया जा रहा है। किसी भी ब्लॉगर मीट के बाद कोई अपनी व्यक्तिगत शाम क्या खा-पीकर या एन्जॉय करके गुजारता है। उसपर क्यों इतना बवाल मचाया जा रहा है। जब हम ब्लॉग में अपने दैनिक अनुभव भी लिखते हैं तो क्या बुरा किया, जब मैं अपने दारु पीने की बात को भी सबको बता रहा हूँ। "थोडी सी जो पी ली है, चोरी तो नहीं की है" मैनें खुद को छुपाया नहीं, उघाडा है। मैनें तो स्वीकारा है कि मैं ये कर्म भी करता हूँ, और लिखता भी हूँ। दूसरों की तरह ना चेहरा छुपाये हूँ , ना अपनी कमियां और ना अपने दिल का कालापन। वर्ना यहां तो मुंह में राम बगल में छुरी और नकाब पे नकाब लगाये फिरते हैं लोग। क्या लिखना है यह भी उन्हें दूसरे लोग बताते हैं या खुद ही दूसरे नाम या आईडी से पोस्ट लिखते हैं।
आपको कु्छ ब्लॉगर्स का पीना-पिलाना दिखाई दे गया और वो बुरे हो गये। लेकिन ईमानदारी से कहियेगा क्या ये आपके लिये पहले से ही बुरे नहीं थे क्या? आईये रोहतक, मैं आपको उस औरत रेखा से मिलवाता हूँ, जिसने हम पीने-पिलाने वालों के लिये रात 11-11 बजे तक रोटियां बनाई हैं। उससे पूछियेगा कि उसने इन ब्लॉगरों में अपने भाईयों को नहीं देखा है क्या? वो जवाब देगी आपको। जब हम पी रहे थे और हमारे लिये खाना बनाती थी तो क्या उसे हमने उनके सगे भाईयों से कम स्नेह दिया। मैं पीने के बाद रात को रेखा को उसके घर तक छोडने जाता हूँ तो क्या वो एक बुरे अनजान आदमी के साथ डरी हुई जा रही थी या एक भाई के साथ जैसा फील कर रही थी। अलबेला जी ने रेखा के बेटे के ऑप्रेशन के लिये हर संभव सहायता और आर्थिक खर्च देने का वायदा किया है। और ये कहा था कि एक भाई अपनी बहन की मदद करना चाहता है। आईये और पूछिये उपरोक्त सवाल रेखा से। उसके बाद ईमानदारी से लिखियेगा अपनी पोस्ट बिना किसी रंजिश को दिल में रखकर। एक तिलयार मीट तिलयार मीट चिल्लाने से अच्छा है कुछ गालियां ही दे कर अपनी भडास निकाल लीजिये।
हर तरह के लोग हैं, दुनिया में। सुरापान के बाद भी हम होश में रहते हैं और आप जैसे बिना पिये भी नशे में बके जाते हैं। जय हो तुम्हारे विचारों की।
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल
12/25/10
आप क्या सब्जी खाते हैं?
गुप्ता जी के घर पर आयकर विभाग का छापा पडा है।
अरे! क्या वो रिश्वत लेते थे?
नहीं, वो तो व्यापार करते हैं।
तो क्या, आयकर भरने में कोई धांधली करते थे?
पता नहीं, लेकिन कल सुबह ही उन्होंने आधा किलो प्याज खरीदी थी।
अन्तर सोहिल द्वारा लघु व्यंग्य कथा
अरे! क्या वो रिश्वत लेते थे?
नहीं, वो तो व्यापार करते हैं।
तो क्या, आयकर भरने में कोई धांधली करते थे?
पता नहीं, लेकिन कल सुबह ही उन्होंने आधा किलो प्याज खरीदी थी।
अन्तर सोहिल द्वारा लघु व्यंग्य कथा
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल
12/21/10
दान देने का पुरातन और बढिया तरीका, सही या गलत?
मुझसे कोई जागरण आदि के लिये चंदा लेने आता है तो मैं कहता हूँ कि पहले आप रसीद पर यह लिख कर लायें कि "जनता के सहयोग से आयोजित या चंदे से आयोजित"। मण्डियों में जब किसान फसल लेकर आता है तो बनिया व्यापारी खरीदता है। फिर किसान की पेमेंट में 100 रुपये पर 25 पैसे (कहीं कम-ज्यादा भी) "धर्मादा" काट कर पेमेंट करता है। साल भर में इसी धर्मादा खाते में हजारों और किसी किसी के पास लाखों भी इकट्ठे हो जाते हैं। पैसा किसका है किसान का, दान देता है अपनी फर्म के नाम पर बनिया व्यापारी। धर्मशाला या मन्दिर में पत्थर पर लिखवा कर लगवायेगा कि फलाना एण्ड ढिकाना कम्पनी ने इस कमरे के लिये या गेट के जीर्णोद्धार के लिये xxxxxx रुपये का दान दिया। है ना बढिया तरीका दान देने का।
| बुरे का बदला बुरा मिलेगा, किया नहीं तो करके देख क्या बीती बुरा करने वालों पर उनसे हाल पूछके देख |
|---|
मेरी समझ में तो यही आता है कि परमात्मा या प्रकृति हमेशा सबका बैलेंस बराबर रखती है। हमारा भविष्य हमारे प्रतिदिन के बल्कि पल-पल के क्रियाकलापों पर आधारित है। इसलिये चाहता हूँ कि बस इसी पल की फिक्र करूं और किसी को मेरी वजह से कोई तकलीफ ना हो।
अन्तर सोहिल का प्रणाम स्वीकार करें
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल
12/1/10
अनाथ से शादी क्यों?
कल की पोस्ट पर यह सवाल सबसे महत्त्वपूर्ण है। मैं ना तो मित्र के सम्बन्धी विवाह के इच्छुक नरेन्द्र टक्कर को मिला हूँ और ना ही उनको जानता हूँ। चूंकि मेरे मित्र ने जब मुझसे अनाथालय से शादी की जानकारी प्राप्त करने के बारे में कहा था, तो मेरे मन में भी सबसे पहले यही सवाल आया था।
अनाथ से शादी क्यों? इस सवाल पर अपने मित्र से बातचीत करने पर जो मैं समझ पाया हूँ, वह आपको बता देता हूँ। हरियाणा में लिंग अनुपात की विकट समस्या के चलते बहुत से लोग आजकल बिहार, उडिसा, पश्चिम बंगाल आदि से लडकियां खरीद कर विवाह रचा रहे हैं।
1> लडके के मन में भी मुझे कोई परोपकार आदि का भाव हो ऐसा नहीं लगता है। उस का उद्देश्य विवाह करके अपना घर बसाना, और अपना स्वार्थ है।
2> चूंकि लडके की उम्र ज्यादा हो चुकी है और उसके अपने समाज से रिश्ता नही हो पा रहा है।
3> माता-पिता वृद्धावस्था में हैं, तो उनकी सोच है कि एक बिना माँ-बाप की बच्ची उनका ज्यादा ध्यान रख सकती है।
4> निकट सम्बन्धी भी ज्यादा नहीं हैं और जो हैं इस मामले में सहायक नहीं हैं।
5> अनजान परिवारों से रिश्ता जोडने के बाद जो घटनाओं के समाचार आजकल आ रहे हैं, उस वजह से भी अनाथ लडकी के साथ विवाह से सुरक्षा महसूस करते है।
मेरी भूमिका इतनी है कि मैं उन्हें किसी अनाथालय का पता और इस बारे में कोई जानकारी हो तो केवल अपने मित्र को दे दूं। मैं कोई जमानती बनने या उनके साथ जाने वाला नहीं हूँ। और सच यह है कि "परहित" या "समाज सेवा" आदि का कोई ख्याल मेरे मन में अभी तक तो नहीं आता है।
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल
11/30/10
किसी अनाथालय में रह रही लडकी से शादी
किसी अनाथ या अनाथालय में रह रही लडकी से शादी करने के लिये क्या प्रक्रिया या तरीका है और कागजी कार्रवाई की जाती है। किसी ऐसे अनाथालय का पता बता दें, जहां से सब जानकारी मिल सके। यह सवाल मेरे एक मित्र ने पूछा है। उनके एक सम्बन्धी किसी अनाथ या अनाथालय में पली बढी लडकी से शादी करना चाहते हैं। दिल्ली के आसपास कौन से अनाथालय या संस्था है जो इस मामले में मदद कर सकती है।
अपडेट :
सुश्री रचना जी की टिप्पणी आने के बाद मैनें अपने मित्र से ये जानकारी ली है। सोचा लिख ही दूं।
नाम - नरेन्द्र टक्कर (अरोडा)
जन्मतिथि - 30-05-1972
आय - 10000-15000
आय का स्त्रोत - फोटोग्राफर है (किराये की दुकान) करीबन 7 वर्ष से यही कार्य करता है
सम्पत्ति - पैतृक घर (60 गज) और खुद का खरीदा एक प्लॉट है
घर में सदस्य - वृद्ध माता-पिता और खुद
भाईबहन - भाई नहीं है, एक बहन है (विधवा है और अपने दोनों बच्चों के साथ ससुराल के घर में रहती है)
पिता का व्यवसाय - एक ऑटो है (किराये पर कोई ड्राईवर चलाता है)
पिता की आय - 8000-12000
पहले (अबतक) विवाह क्यों नहीं हुआ या शादी क्यों नहीं की? इस सवाल का जवाब संतुष्टिदायक नहीं मिला।
नाम
Antar Sohil,
अन्तर सोहिल
Subscribe to:
Posts (Atom)
मुझे शिकायत है !!!
उन्होंने ईश्वर से डरना छोड़ दिया है , जो भ्रूण हत्या के दोषी हैं। जिन्हें कन्या नहीं चाहिए, उन्हें बहू भी मत दीजिये।



































